लगता है विजय माल्या को यह लग गया है कि 2019 में वह भारत की जेल में आ सकता है। अरुण जेटली से मिलने का स्कूप इसी लिए उस ने बिन मांगे कांग्रेस को थमा दिया है। लेकिन एक भगोड़े के बचाव के बयान को ले कर जिस बचकाने ढंग से समूची कांग्रेस आक्रामक हुई है , वह और हैरत में डालता है । तो क्या राफेल घोटाले की ताकत का अंदाज़ा भी कांग्रेस को अब हो गया है जो वह विजय माल्या , जेटली मिलन को राष्ट्रीय बहस बना कर उछल पड़ी है ।
सर्वाधिक दिलचस्प अतिशय भ्रष्ट नौकरशाह रहे और जातिवादी पी एल पुनिया की सुरागरसी भरी गवाही है कि माल्या के देश से भागने के पहले उन्हों ने जेटली , माल्या मिलन को सेंट्रल हाल में अपनी आंखों से देखा । तो क्या उस वक्त लोकसभा के सेंट्रल हाल में सिर्फ़ यही तीन थे ? बाक़ी कोई और कांग्रेसी , वामपंथी , प्रतिपक्षी आदि सब के सब अनुपस्थित थे । पुनिया अब कह रहे हैं कि सेंट्रल हाल के सी सी कैमरे खंगाल कर यह तथ्य देखा जा सकता है । गुड है यह भी । लेकिन मजा तो तब था जब माल्या के भागते ही पुनिया ने यह खुलासा किया होता और सी सी कैमरे खंगाल लेने की तजवीज दिए होते ।
सच तो यह है कि भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही विजय माल्या, नीरव मोदी, चौकसी जैसे आर्थिक भगोड़ों और लुटेरों के बराबर के मददगार और भागीदार हैं । यह जो मददगार भागीदार न होते तो देश की तस्वीर कुछ और होती, आर्थिक भगोड़ों और लुटेरों की कुछ और । जाने कैसे क़ानून का राज इन आर्थिक गुंडों, लुटेरों और भगोड़ों के लिए सो जाता है । लोगों की आंख में धूल झोंकने के लिए सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष नूरा कुश्ती लड़ते रहते हैं । लेकिन गरीबों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने के लिए निरंतर जागता रहता है यह हमारा क़ानून का राज । अरुण जेटली हों या राहुल गांधी, दोनों ही दूध के धुले हुए नहीं हैं ।
- दयानन्द पांडेय








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