डॉ दिलीप अग्निहोत्री
चुनाव में जय पराजय का निर्णय मतदाता करते है,लेकिन इसमें संदेह नहीं कि अमित शाह की चुनावी तैयारी का अंदाज आक्रामक होता है। वह पूरी तैयारी के साथ जनता की अदालत में जाने पर यकीन रखते हैं। लखनऊ में आयोजित समन्वय बैठक से यह तथ्य एक बार फिर प्रमाणित हुआ।यह समन्वय बैठक थी। इसमें अमित शाह ने मौजूद लोगों को चुनावी रणनीति का स्वरूप बता दिया। पहला यह कि नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियां अभूतपूर्व है। करोड़ो गरीब परिवार इससे लाभान्वित हो रहे है, दूसरा यह कि नरेंद्र मोदी ने मजबूत नेतृत्व, और नीतिगत निर्णय लेने वाली सरकार दी है। यह देशहित में होगा कि अगले दस वर्षों तक ऐसी ही मजबूत सरकार केंद्र में रहे। तभी भारत विकसित देश बन सकेगा। यह सन्योग था कि मजबूत सरकार की यह बात नई दिल्ली में राष्ट्रीय सूचना सलाहकार अजीत डोभाल ने कही। तीसरा यह कि शाह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के कार्यो की प्रशंसा की, लेकि कुछ मंत्रियों के प्रति उनकी नाराजगी भी दिखाई दी। इसी प्रकार अपने कर्तव्यों का निर्वाह न करने वाले सांसद भी निशाने पर आ सकते है। बताया जाता है अमित शाह ने कुछ मंत्रियों के कार्यों की समीक्षा के विषय में कहा है। मुख्यमंत्री से कहा गया कि वह इस ओर ध्यान दें।
इसमें संदेह नहीं कि योगी आदित्यनाथ बड़ी मेहनत और ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे है। इन्वेस्टर्स समिट के छाठ हजार करोड़ रुपये के प्रस्तावों का शिलान्यास अभूतपूर्व था। एक जिला एक उत्पाद की प्रगति भी उल्लेखनीय है। लेकिन अनेक मंत्री योगी के साथ कदम मिला कर चलने में नाकाम साबित हो रहे है। इन पर आरोप भी लग रहे है। इनके विभागों की छवि जनता के बीच ठीक नहीं जा रही है। ऐसी व्यवस्था का भ्रष्ट अधिकारी ,कर्मचारी जम कर फायदा उठाते है। आमजन को इसका प्रत्यक्ष अनुभव हो रहा है। ऐसे मंत्री और अधिकारियों पर नकेल कसने की आवश्यकता है।

अमित शाह ने सरकार की उपलब्धियों को जोरशोर से जनता के बीच ले जाने कर निर्देश दिए। यह भी चर्चा है कि उत्तर प्रदेश के अनेक संसद सदस्य और प्रदेश सरकार के कुछ मंत्री भी हाईकमान के निशाने पर हैं। कमजोर कड़ियों से किनारा किया जा सकता है।
जहाँ तक राष्ट्रीय स्वयं संघ का प्रश्न है वह सामाजिक संस्कृति संघठन है। सलाह देने और राष्ट्रवादी सरकार के निर्माण में स्वयंसेवक अपनी भूमिका का निर्वाह करते है। मजबूत नेतृत्व और सरकार की बात केवल अमित शाह ने नहीं कही, बल्कि अजित डोभाल ने इसे वैश्विक परिदृश्य से जोड़ कर बताया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने गुरुवार को कहा कि देश को अगले दस वर्ष तक मजबूत, स्थिर और निर्णय लेने वाली सरकार की जरूरत है। मजबूत सरकार हमारे राष्ट्रीय, राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए जरूरी है। कमजोर गठबंधन भारत के लिए खराब साबित होगा। भारत अगले कुछ सालों तक सॉफ्ट पावर बनकर नहीं रह सकता। देश को कठोर निर्णय लेने पड़ेंगे। अगर हमें शक्तिशाली बनना है तो हमारी अर्थव्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए। हमें वैश्विक प्रतिद्वंदी बनना पड़ेगा। इसके लिए हमें तकनीकी तौर पर आगे बढ़ना होगा। डिफेंस के सभी उपकरण के साथ सौ प्रतिशत तकनीक भी मिलना चाहिए। यही सरकार की नीति होगी।
बैठक में संघ के सैंतीस अनुषंगिक संगठनों के अलावा छह प्रांतों की टोली, भाजपा पदाधिकारी और सरकार के प्रतिनिधि शामिल हुए। संघ हिंदुत्व के मुद्दे पर लोगों को जागरूक बनाने के कार्य में लगा है। कोउ नृप होय हमें का हानी की मानसिकता उचित नहीं है। संघ हिंदू समाज और राष्ट्र के अनुकूल गतिविधियां संचालित करता हैं। सभी आनुषंगिक संगठन स्वतंत्र हैं और सब अपना-अपना निर्णय लेते हैं। वैचारिक आधार अवश्य इनको एक सूत्र में जोड़ता है। हिंदू समाज के जागरण का परिणाम है कि अब प्रत्येक राजनीतिक पार्टी हिंदुत्व की चर्चा करने लगी है। अपने को हिन्दू रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है।
जबकि भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी है। वह इस बार भी पहले जैसी सफलता की तैयारी कर रही है। पिछले लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा को मिले विशाल जनसमर्थन से मणिपुर व त्रिपुरा तक उन्नीस राज्यों में भाजपा की सरकार कायम हुई है।अमित शाह ने नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियां बताई। जाहिर है कि भाजपा विकास के बल पर चुनाव में उतरना चाहती है। सत्तारूढ़ पार्टी के लिए यह स्थिति सबसे अच्छी होती है। अमित शाह ने कहा कि यह हमारी प्रतिबद्धता है लेकिन, हम संवैधानिक मर्यादा से बंधे हैं।
संघ की इच्छा कुंभ के आयोजन को अविस्मरणीय और अभूतपूर्व बनाने इस आयोजन को और भव्य बनाया जा सकता है। इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने के बाद फैजाबाद का नाम अयोध्या करने की मांग उठ रही है। इसके अलावा अयोध्या में इस बार भी भव्य दीपोत्सव मनाने की तैयारी है।
संघ यह भी चाहता है कि कुंभ को अविस्मरणीय और अभूतपूर्व बनाने में कोई कसर न छोड़ी जाए। इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने के बाद फैजाबाद का नाम अयोध्या करने की मांग उठ रही है। इसके अलावा अयोध्या में इस बार भी भव्य दीपोत्सव मनाने की तैयारी है। कई पदों पर नियुक्तियों के अलावा लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार से उम्मीदों पर भी बातचीत प्रस्तावित है। जाहिर है कि उत्तरप्रदेश में विपक्ष असमंजस की स्थिति में है। वही भाजपा ने इस मामले में बढ़त बना ली है।








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