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    Home»उत्तर प्रदेश

    बिजली दर की सार्वजनिक सुनवाई रही हंगामेदार, आयोग ने उच्चाधिकारियों को लगायी कड़ी फटकार

    By December 14, 2018 उत्तर प्रदेश No Comments5 Mins Read
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    • आयोग ने जूनियर अभियन्ताओं को बैठक से किया गेट आउट, उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष के सवालों के सामने पावर कार्पोरेशन अभियन्ताओं की बोलती बन्द
    • उपभोक्ता परिषद घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के फिक्स चार्ज को समाप्त करने एवं रेग्यूलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत को समाप्त करने सहित उठाये कई मुददे

    लखनऊ, 14 दिसम्बर 2018: विद्युत नियामक आयोग के सुओ मोटो आदेश पर बिजली कम्पनियों द्वारा वर्ष 2018-19 के लिये बिजली दर संबंधित प्रकाशित विज्ञापन व टू्रअप वर्ष 2016-17 एवं वार्षिक परफारमेंस वर्ष 2017-18 पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग सभागार में आज आयोग अध्यक्ष श्री आरपी सिंह सदस्यगण श्री एसके अग्रवाल व केके शर्मा की उपस्थिति में आम जनता की सार्वजनिक सुनवाई सम्पन्न हुई।

    बता दें कि पावर ट्रांसमिशन कम्पनी की तरफ से किसी निदेशक स्तर के अधिकारी की सुनवाई के दौरान उपस्थित न रहने पर नियामक आयोग ने फटकार लगाते हुए ट्रांसमिशन कम्पनी के उपस्थित जूनियर अभियन्ताओं को सुनवाई से बाहर जाने का फरमान सुना दिया, जिससे बिजली कम्पनियों के होश उड़ गये।

    पावर कार्पोरेशन की तरफ से बिजली दर पर एक प्रस्तुतीकरण किये जाने के बाद सुनवाई आरम्भ हुई। आयोग की सुनवाई में सर्वप्रथम प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने अपनी बात रखते हुए घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के फिक्स चार्ज को समाप्त करने ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में कमी रेगुलेटरी सरचार्ज को पूर्णतः समाप्त करने, वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की मिनिमम गारण्टी चार्ज समाप्त करने हेतु अपनी बात रखते हुए आयोग को विस्तार से यह अवगत कराया कि प्रदेश की बिजली कमपनियाॅं सुधार के बडे बडे दावे करती हैं लेकिन आज सभी बिजली कम्पनियों के जो कुल 75486 करोड़ के वार्षिक राजस्व आवश्यकता पर चर्चा हो रही है, उस पर आयोग को गम्भीरता से यह सोचना होगा कि वर्ष 2000-2001 में बिजली कपिनियों का जो कुल घाटा मात्र 77 करोड था, वह अब वर्तमान में लगभग 85 हजार करोड कैसे हो गया।

    उन्होंने कहा कि सबसे बडा चौकाने वाला मामला यह है कि उदय अनुबन्ध जब हुआ था तब घाटा मात्र 70 हजार 738 करोड था और उदय अनुबन्ध कर बड़े -बड़े दावे किये गये थे, अब इतना बड़ा घाटा कैसे हुआ?

    उन्होंने कहा कि बिजली कम्पनियां लगातार कभी भी समय से आडिट नहीं कराती। बड़े पैमाने पर बिजली चोरी हो रही है, उस पर अंकुश नहीं लगाती।

    इसी प्रकार उपभोक्ता परिषद ने कहा कि मार्च 2018 तक बिजली कम्पनियों का सरकारी विभागों पर 10 हजार 756 करोड का बकाया हो गया। उप्र में बिजली दुर्घटनाओं से जहाॅं पूरे साल 400 लोगों की जाने पहले जाती थीं वहीं अब लगभग 958 लोगों की जानें गयी हैं। केन्द्र सरकार द्वारा बिजली कम्पनियेा की रेटिंग में एक बिजली कम्पनी को छोडकर सभी फिसडडी साबित हुयी हैं।

    बिजली कम्पनियाॅं सबको 24 घंटे बिजली देने की बात कर रही हैं लेकिन शायद वह यह भूल गयीं कि पावर फार आल में 33 केवी स्तर पर वितरण ट्रांसफार्मरों की कुल क्षमता लगभग 44677 एमवीए बतायी गयी है यानि कि सिस्टम की क्षमता लगभग 3 करोड 79 लाख किलोवाट। वहीं सितम्बर 2018 तक कुल विद्युत उपभोकताओं की जो संख्या है वह लगभग 2 करोड 21 लाख है और उनके द्वारा स्वीकृत भार जो लिया गया है वह 5 करोड 45 लाख किलोवाट हे। ऐसे में कारपोरेशन की क्षमता और उपभोक्ताओं के द्वारा लिये गये भार के बीच लगभग 2 करोड किलोवाट का अंतर है ऊपर से 25 प्रतिशत बिजली चोरी का लोड। ऐसे में पीक आवर्स में गर्मी में डायवर्सी फैक्टर 1 अनुपात 1 पर यह सिस्टम कैसे चलेगा पूरी तरह मिसमैच है।

    सुनवाई के दौरान मध्यांचल कम्पनी के प्रबन्ध निदेशक श्री संजय गोयल ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष सहित अन्य उपभोक्ताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सरकारी बकाया वसूली पर काम चल रहा है, जल्द ही अच्छे परिणाम सामने आयेंगे। आयोग जो निर्णय करेगा, उस पर कम्पनियां काम करेंगी। ग्रामीण क्षेत्र में मध्यांचल द्वारा टर्नअप बढ़ाने पर लगातार कार्य किया जा रहा है।

    सुनवाई में अन्य उपभोक्ताओं पीएन कल्कि, राकेश गोयल, बीएन गुप्ता ने अपनी बात रखते हुए बिजली कार्मिकों के घरों में बिजली के मीटर लगाने के पुरजोर वकालत की और कहा जब तक मीटर नहीं लगेगा तब तक एनर्जी एकाउन्टिंग नहीं की जायेगी। एक घरेलू उपभोक्ता शिवाकान्त त्रिपाठी ने बिजली चोरी पर रोक लगाने व बिजली बचाने पर जोर दिया। सुनवाई में रमाशंकर अवस्थी ने जहां ट्रांसमिशन हानियों पर अपनी बात रखी, वहीं बीएन गुप्ता, अवधेश अग्रवाल ने अविलम्ब रेगुलेटरी सरचार्ज को समाप्त करने की मांग उठाते हुए उद्योगों की दरों में कमी की बात उठायी। प्रखर कुलश्रेष्ठ व रचित अग्रवाल ने भी नये कनेक्शन व मल्टी प्वाइंट पर अपनी बात रखी। आलोक कुमार ने गरीबों के लिये नये टैरिफ की वकालत की।

    सुनवाई के अन्त में नियामक आयोग अध्यक्ष श्री आरपी सिंह ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष व अन्य विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा रखे गये बिन्दुओं पर कहा कि सभी उठाये गये मुद्दों को टैरिफ आदेश मे विचारित किया जायेगा, अभी भी प्रदेश में सुधार की बहुत गुन्जाइश है। उन्होंने कहा कि यह सोच का विषय है कि जो बिजली का उपभोक्ता लगातार भुगतान करता है उसी पर भार डाला जाता है। ऐसे में वह उपभोक्ता जो बिजली का बिल लगातार जमा करते हैं वह हतोत्साहित होते हैं और जो बिजली का बिल जमा नहीं करते विभाग उन पर उदासीन रहता है, जो पूरी तरह गलत है। कम्पनियों को समय से आडिट कराना व सरकारी विभागों के बकाया वसूली पर जोर देना अतिआवश्यक है।

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