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    Home»ब्लॉग»Hot issue

    विरजू महाराज की कत्थक परम्परा से प्रेरणा

    By January 8, 2019Updated:January 8, 2019 Hot issue 3 Comments3 Mins Read
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    Post Views: 903
    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    लखनऊ, 08 जनवरी 2019: भारतीय शास्त्रीय संगीत में लखनऊ घराने के विशेष महत्व है। कत्थक सम्राट पद्मविभूषण विरजू महाराज ने इसे बुलंदियों पर पहुंचाया। लखनऊ के विद्यांत शिक्षण संस्थान का नाम आते ही वह भावुक हो जाते है। विरजु महाराज ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा यहीं से ग्रहण की थी।
    उन्होंने एक बार स्वयं बताया था कि बचपन से ही शिक्षा के संगीत में उनकी गहरी रुचि थी। क्लास और स्कूल में भी मौका मिलने पर वह नाचते थे। विद्यांत स्कूल के बाहर के दुकानदारों तक उनके विलक्षण हुनर की चर्चा पहुंच गई थी। होनहार विरवान के होत चिकने पात। विरजू महाराज ने बताया था कि उन्हें पतंग उड़ाने का शौक था। वह स्कूल के बाहर पतंग लेने जाते थे। वहां लोग उनके नृत्य के मुरीद थे। फरमाइश होने लगती थी। उनके नन्हे कदम थिरकने लगते थे। दुकानदार उन्हें बिना पैसा लिए पतंग दे दिया करते थे।
    विरजू महाराज को आज भी यह सब याद है। अक्सर वह लखनऊ आते है। एक बार मुलाकात में उनसे विद्यांत स्कूल की चर्चा छेड़ी, ऐसा लगा जैसे वह अपने बचपन में लौट गए हो। जब वह नृत्य के बदले पतंग ले लिया करते थे। तब किसी को यह कल्पना नहीं रही होगी कि यह बालक कत्थक जगत के शिखर पर आसीन होगा। विरजू महाराज के देश में अनगिनत शिष्य है। देश के अनेक हिस्सों में जाकर वह शिष्यों और कत्थक कलाकारों की नृत्य की बारीकियां समझते रहे है।
    कत्थक सम्राट विरजू महाराज का नाम विद्यांत से सदैव जुड़ा रहेगा। विद्यांत कालेज की सांस्कृतिक परिषद का यह प्रयास रहा है की नृत्य में रुचि रखने वाले विद्यार्थी विरजू महाराज की परंपरा का पालन करें। लखनऊ का  कालिका बिन्दादिन ड्योढ़ी में कत्थक का केंद्र था। बिरजू महाराज के  दो चाचा व ताऊ, शंभु महाराज एवं लच्छू महाराज भी कत्थक के साधक थे। इनके पिता अच्छन महाराज थे। जिन्होंने बिरजू महाराज को संगीत शिक्षा दी। बिरजू महाराज ने कत्थक नृत्य में नए रंग जोड़े।
    इन्होंने पन्द्रह सौ ठुमरियों का कमोजिशन किया। लखनऊ घराना कथक नृत्य शैली में छोटे टुकड़ों का महत्व होता है।
     नृत्य के बोलों के अतिरिक्त पखावज की परने  और परिमलु के बोल भी नाचे जाते हैं। यह सन्तोष का विषय है कि विद्यांत हिन्दू पीजी कालेज के अनेक विद्यार्थी लखनऊ घराने के नृत्य को सीख रहे है। राहुल सिंह और अंजुल कुमार दोनों राष्ट्रीय स्तर के संगीत समारोहों में कई बार प्रदर्शन कर चुके है। अंजुल कुमार  ने विरजू महाराज की नृत्य कार्यशाला में सहभागी रह चुके है। यहां उन्होंने बहुत कुछ सीखा। दूरदर्शन पर इनका नृत्य प्रसारित हो चुका है। इनको राष्ट्रीय गोपी कृष्ण अवार्ड से नवाजा गया है। ताज महोत्सव, लखनऊ महोत्सव में भी इनकी प्रस्तुति होती रही है।
    इस समय अंजुल विद्यांत हिन्दू पीजी कालेज में बीए द्वितीय वर्ष के छात्र है। राहुल सिंह भी विद्यांत के विद्यार्थी है। इनको भी उत्तर प्रदेश रत्न सहित कई पुरष्कार मील चुके है। लखनऊ महोत्सव में भी इनके कार्यक्रम होते रहे है। लखनऊ के विद्यांत स्कूल, इसके संस्थापक वीएन विद्यांत, पूर्व छात्र विरजू महाराज के नाम जुड़े हुए है। यह सन्तोष का विषय है कि विद्यांत के कई विद्यार्थी लखनऊ घराने के कत्थक और विरजू महाराज की परंपरा से सीख रहे है प्रेरणा ले रहे है।

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    3 Comments

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