डॉ दिलीप अग्निहोत्री
नवजोत सिद्धू को एक कॉमेडी शो ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। सिद्धू का अट्टहास लोगों को खलने लगा था। उस शो की टीआरपी रसातल में जा रही थी। फिर भी सिद्धू के दोस्त इमरान खान ने उन्हें अपने ही ऊपर हंसने का मौका दिया है। ये बात अलग है कि पाकिस्तान में इमरान और भारत मे सिद्धू खुद ही तमाशा बन चुके है। इमरान पुलमावा हमले का सबूत मांग रहे है। यहीं से सिद्धू की कॉमेडी शुरू होनी चाहिए। पाकिस्तान का एक आतंकी सरगना हमले की जिम्मेदारी कबूल कर चुका है। यह भी बताया जा रहा है कि हमले की तैयारी किस प्रकार की गई। इमरान उसी को पकड़ कर सबूत ले सकते है। लेकिन मांग रहे है। यह ताली ठोंकने की बात हुई। फिर इमरान फरमाते है कि भारत सबूत दे तो कार्यवाई होगी।फिर ताली। क्या पाकिस्तानी प्रधानमंत्री में आतंकियों के खिलाफ कार्यवाई करने औकात है। वह आतंकियों के सिर पर सेना का हाँथ रहता है। इमरान परमाणु बम के प्रयोग की धमकी भी दे रहा है। लेकिन उसे यह भी सोचना चाहिए कि भारत ने जबाब दिया तो पाकिस्तान का क्या होगा।
वस्तुतः पाकिस्तानी प्रजातंत्र की हकीकत एक बार उजागर हुई। पुलमावा आतंकी हमले पर प्रधानमंत्री इमरान खान ने मुंह खोलने में पांच दिन लगा दिए। करीब छह मिनट की उनकी रिकार्डिंग में तीस जगह एडिटिंग की गई। बताया जाता है कि यह कार्य सेना के चुनिंदा कमांडरों ने किया। इस बीच विश्व के अनेक देशों ने पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों को गलत बताया।

सऊदी प्रिंस ने पाकिस्तान में निवेश नहीं किया , बल्कि उसे आर्थिक पैकेज दिया है। जो पाकिस्तान की आर्थिक दशा को देखते हुए बहुत कम है। उन्होंने नई दिल्ली में आतंकवाद के विरोध में बयान दिया। अमेरिका ने आतंकी संघठनों को पनाह देने के प्रति गंभीर चेतावनी दी। फ्रांस सहित यूरोप के कई देशों ने पाकिस्तान की निंदा की इस्राइल ने कहा कि पाकिस्तान पर भारत हमला करे, वह न केवल भारत का साथ देगा, बल्कि पाकिस्तान को सबक भी सीखा देगा। इस्राइल आतंकवाद के बहुत खिलाफ रहता है। अमेरिका ने कहा कि पुलवामा आतंकी हमले ने आतंकवाद के मामले में भारत के साथ अमेरिकी सहयोग की प्रतिबद्धता को मजबूत किया है। अमेरिका ने कहा कि वह आतंकवाद की तह तक पहुंचने के लिए भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है।
भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ आई जेस्टर ने यहां कहा, आतंकी हमले की तह तक पहुंचने में हम भारत सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हमने पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी पनाहगाहों की पहले भी निंदा की है। हमने पाकिस्तान को सैन्य सहयोग देना बंद कर दिया है। पुलवामा की घटना पर उन्होंने कहा, यह भीषण हमला था। इसने आतंकवाद निरोधक मामलों पर भारत के इमरान खान सेना के सामने नतमस्तक होने के बाद ही चुनाव जीत सके थे।
प्रजातंत्र में मतदाताओं के समर्थन से कोई पार्टी विजयी होती है। लेकिन पाकिस्तान में सेना जिसका समर्थन करती है, उसी की ताजपोशी तय हो जाती है। सेना का नवाज शरीफ की पार्टी मुस्लिम लीग और आसिफ अली जरदारी की पार्टी पीपीपी पर से विश्वास उठ गया था। अंत में इमरान की ही पार्टी बची थी। इमरान ने सेना से समझौता किया। जिसके कारण वह चुनाव में विजयी रहे। ऐसे में इमरान ने जो कहा , वह उनकी जुबान नहीं है। पाकिस्तान की तरह वहाँ के निजाम पर भी विश्वास नहीं किया जा सकता।







