लखनऊ, 5 मार्च 2019: नवजात के लिए मां का पहला दूध अमृत के समान है. लेकिन दुख की बात है कि कई नवजात शिशुओं को अलग-अलग कारणों से नहीं मिल पता है. इस दिशा में यह ह्यूमन मिल्क बैंक वरदान साबित होगा. यह कहना है चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन का. चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने मंगलवार को के.जी.एम.यू. (किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज) में ह्यूमन मिल्क बैंक का उद्घाटन किया. इस मौके पर प्रमुख सचिव डॉ रजनीश दूबे, कुलपति प्रो. एम.एल.बी.भट्ट मौजूद रहे.
ह्यूमन मिल्क बैंक के बारे में बाल रोग चिकित्सा विभाग की प्रो. माला कुमार ने विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ह्यूमन मिल्क बैंक का प्रमुख उद्देश्य है कि मां को स्तनपान का महत्व उसको और उसके घर वालों अच्छे से समझाया जाये. ताकि हर मां अपने नवजात को जन्म के एक घंटे के भीतर ही स्तनपान कराए. पूरी कोशिश रहे कि यह स्तनपान का क्रम कम से कम छह माह तक चलता रहे. जिससे नवजात मृत्यु कम हो सकती है. प्रो. माला ने बताया कि जिन माताओं को अधिक दूध श्रवित होता है उनको इस बात के प्रेरित किया जाए कि वह अपना दूध अन्य जरूरतमंद नवजात के लिए दान करें. जिसको यहां सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है.

उन्होंने बताया की देश में 1989 में महाराष्ट्र में पहली इसकी स्थापना हुई. वर्तमान में देश में कुल 60 ह्यूमन मिल्क बैंक हैं. इसमें सर्वाधिक राजस्थान में 18 और 15 महाराष्ट्र में हैं. उन्होंने बताया कि के.जी.एम.यू. में स्थापित हुए ह्यूमन मिल्क बैंक में करीब 17 लोगों का स्टाफ है. जिसमें 13 लैकटेशेन काउन्सलेर्स हैं. इस ह्यूमन मिल्क बैंक में अधिकतम 300 लीटर पासचुराइज दूध सुरक्षित रखा जा सकता है. प्रो. माला ने बताया कि के.जी.एम.यू. में प्रतिवर्ष सामान्यतः 15 से 20 हजार माताएं स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं. उनको और उनके नवजात शिशुओं को गुर्वत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं हमारी प्राथमिकता है. इस दिशा में यह स्थापित हुआ ह्यूमन मिल्क बैंक लोगों के लिए काफी मददगार साबित होगा.
कैसे काम करेगा ह्यूमन मिल्क बैंक:
वर्तमान में के.जी.एम.यू. में भर्ती माताओं और उनके नवजात शिशुओं को इसका लाभ दिया जायेगा. अगले चरण में जनपद के अन्य अस्पतालों के मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा. महिलाओं को प्रसव के एक घंटे के भीतर नवजात को दूध पिलना होता है. कई माताओं को नवजात की दूध पीने की क्षमता से अधिक दूध श्रवित होता है. अभी तक इसको सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था नहीं थी. इसके कारण दूध व्यर्थ हो जाता था. अब यही व्यर्थ होने वाला दूध इस ह्यूमन मिल्क बैंक में सुरक्षित रखा जायेगा. आवश्यकता पड़ने पर उस नवजात को दिया जा सकेगा जिस नवजात की मां को किसी कारण से दूध नहीं उतर रहा है.
यूपी की हकीकत:
जनसंख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश सर्वाधिक आबादी वाला राज्य है. यहां पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों और नवजात शिशुओं की मृत्यु दर भी अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है. उत्तर प्रदेश में केवल 25 प्रतिशत नवजात ही जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान करने पा रहे हैं. प्रदेश में अगर सभी नवजात को समय से स्तनपान मिल जाये तो शिशुओं की 33 प्रतिशत मृत्यु दर रोकी जा सकती है. यह एक गंभीर समस्या है. उम्मीद है कि के.जी.एम.यू. के कोम्प्रेहेंसिवे लैकटेशेन मैनेजमेंट सेंटर और क्वींस मेरी के लैकटेशेन मैनेजमेंट सेंटर नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम की जा सकेगी.







