Warning: दूर रखें अपने बच्चों को इससे...

ब्लू व्हेल नाम का ऑनलाइन गेम अब भारत में भी खूनी खेल खेलने आ चुका है. इस गेम का ताजा शिकार मुंबई का 14 साल का बच्चा किशोर मनप्रीत है. मनप्रीत ने गेम के चैलेंज को पूरा करने के लिए 7वीं मंजिल से कूदकर खुदकुशी कर ली. यही नहीं यह गेम दुनिया में अब तक 200 से ज्यादा लोगो कि मौत का कारण बन चुका है।
बेहद खतरनाक है गेम ब्लू व्हेल:
ब्लू व्हेल नाम का ऑनलाइन किलर गेम अब भारत में भी आ चुका है ‘ब्लू व्हेल गेम’ या ‘द ब्लू व्हेल चैलेंज’ नाम का गेम रूस के फिलिप बुडेकिन नाम के शख्स ने 2013 में बनाया था. इस खेल में एक एडमिन होता है, जो खेलने वाले को अगले 50 दिन तक बताते रहता है कि उसे आगे क्या करना है. खेल के आखिरी दिन खेलने वाले को खुदकुशी करनी होती है और उससे पहले एक सेल्फी लेकर अपलोड करनी होती है।
कैसे होते हैं इस गेम के टास्क?
गेम खेलने वाले को हर दिन एक कोड नंबर दिया जाता है, जो हॉरर से जुड़ा होता है. शुरू में हॉरर फिल्म देखने जैसे आसान टास्क दिए जाते हैं. इसके बाद हाथ पर ब्लेड से F57 लिखकर इसकी फोटो अपलोड करने के लिए कहा जाता है. इस गेम का एडमिन स्काइप के जरिए गेम खेलने वाले से बात करता रहता है।
क्या गेम को बीच में छोड़ सकते हैं?
अगर एक बार गेम खेलना शुरू कर दिया, तो वह इसे बीच में नहीं छोड़ सकता. यदि गेम को बीच में छोड़ दिया तो एडमिन आपका फोन हैक कर लेगा और फोन की सारी डिटेल हैक एडमिन के पास चली जाएगी. अगर कोई बीच में गेम छोड़ना चाहे, तो एडमिन की तरफ से धमकी मिलती रहती है कि उसे या फिर उसके माता-पिता को जान से मार दिया जाएगा।
क्यों बनाया गया ये जानलेवा गेम?
2016 में इस गेम के डेवलपर फिलिप वुडकिन को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था. उस वक्त 15 बच्चों ने आत्म हत्या की थी. वुडकिन से पुलिस पूछताछ में पता चला कि वह साइकोलॉजी का स्टूडेंट है. वुडकिन ने पुलिस को बताया कि उसका मकसद समाज की सफाई करना है. वुडकिन के मुताबिक जो अपने जीवन का मूल्य नहीं समझते वो समाज के लिए कचरा हैं और उनकी सफाई करना जरूरी है।
बच्चों तक कैसे पहुंचता है ये गेम?
दुनिया के कई देशों में पहुंचने वाला यह गेम सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचता है. इसे वीकॉनटेकटे नाम की सोशल साइट पर बनाया गया है. ये रूस की सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट है`. गेम की तलाश में जब कोई इस वेबसाइट पर अपना अकाउंट बनाता है तो उसे ब्लू व्हेल सर्च करने पर सैकड़ों तस्वीरें, मैसेज और ग्रुप सामने आ जाते हैं।
क्या होता है ग्रुप में?
ये ग्रुप डिप्रेस करने वाले संदेशों से भरे होते हैं. जिनमें भूत के स्केच, खून बहने की तस्वीरें हाथ की नस काटने और खुद को घायल करने की तस्वीरे मिलती हैं।
क्या है इस गेम के लक्षण:
मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक इस गेम के एडिक्ट ज्यादातर लोग डिप्रेशन के शिकार होते हैं. ऐसे में यदि आपके घर का कोई मेंबर डिप्रेशन का शिकार है तो उसे सोशल मीडिया से दूर रखें।
कैसे बचाएं बच्चों को इस गेम से?
इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में बच्चों में वर्चुअल वर्ल्ड का एडिक्शन होता है। ऐसे में घरवाले बच्चों पर नजर रखें और उनकी इंटरनेट हैबिट पर खास ध्यान दें, इसके अलावा बच्चों को घर में इस तरह का माहौल दें कि वह मां-बाप से कोई बात छिपाए नहीं।







