भारत मे प्राचीन काल से ही शिक्षा का महत्व रहा है। जब विश्व के अन्य क्षेत्रों में सभ्यता का विकास नहीं हुआ था, उस समय हमारे ऋषियों ने वेदों की रचना कर दी थी। शिक्षा, ज्ञान और विज्ञान के बल पर भारत विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित था। आज उसी गौरव के अनुरूप कार्य करने की आवश्यकता है। दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोरखपुर के स्वर्ण जयंती समारोह में में ऐसे ही विचारणीय तथ्यों पर विचार व्यक्त किये गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा मनुष्य के समग्र विकास की आधारशिला है। शिक्षित व्यक्ति ही सभ्य समाज का निर्माण कर सकता है। शिक्षण संस्थाओं को समाज सापेक्ष शिक्षा प्रदान करना आवश्यक है। पाठ्यक्रमों को अधिकाधिक व्यावहारिक एवं समाज सापेक्ष बनाने की आवश्यकता है। स्वच्छ भारत मिशन को शिक्षण अभियान से जोड़ा जाये। इसी क्रम में गोरक्षनाथ साहित्यिक केन्द्र का लोकार्पण भी किया गया। किसी भी संस्था के लिए स्वर्ण जयंती वर्ष काफी महत्व रखता है।
मुख्यमंत्री ने लोगों को आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बनाने के लिए शासन द्वारा लागू योजनाओं से अवगत कराने का आह्वान किये। जिससे जरूरतमंद लोग कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही बच्चों को अपने लक्ष्य निर्धारित कर लेने चाहिए। जिससे सभ्य समाज की स्थापना हेतु अपने रचनात्मक दृष्टिकोण देने में वह सफल हो सकें। महापुरूषों के कृत्यों से प्रेरणा लेकर उनके आदर्शों और मूल्यों को जीवन में अपनाकर कार्य करना चाहिए। देश की मूल चेतना आध्यात्मिक है, समग्र शिक्षा विकसित करना आवश्यक है।
– डॉ दिलीप अग्निहोत्री






