Mother’s day: 10 May:
घर में झीने रिश्ते मैंने
लाखों बार उधड़ते देखे,
चुपके-चुपके कर देती है
जाने कब तुरपाई अम्मा.
बाबूजी गुज़रे आपस में
सब चीज़ें तक़्सीम हुईं,तब-
मैं घर में सबसे छोटा था
मेरे हिस्से आई अम्मा.
- आलोक श्रीवास्तव (@AalokTweet)
माँ का हृदय पत्थर नहीं होता
टूटकर कभी बदतर नहीं होता
बड़ी दृढता से ढोता है गमों का बोझ
जिंदा रखता है सदा ममतामयी सोच
यह होता है एक न्यायालय की तरह
जहाँ करती है वो खुद से ही जिरह
पूछती रहती है खुद से ही सवाल
क्यों दूँ यहाँ से यादों को निकाल
बीते हुए पलों को क्यों न महसूस करूँ
मेरे अपनों को यहाँ क्यों न महफूज करूँ
माँ का हृदय कभी चकनाचूर नहीं होता
अपने टुकड़ों से कभी दूर नहीं होता।
- देवेश पांडेय
मैं शब्द हूं वह पूरी भाषा हैं
उनके होने से मेरा होना है।

मां शब्द नहीं संस्कार है ।
मां के आंचल में छुपा पूरा ब्रह्मांड है ।।

- विनायक राजहंस
ओ माई मेरी, क्या फ़िक्र तुझे?
क्यूँ आँख से दरिया बहता है?
तू कहती थी, तेरा चाँद हूँ मैं
और चाँद हमेशा रहता है..

माँ पूछे तो कहता हूँ बहुत अच्छा हूँ,
मैं उसके लिए अब भी छोटा सा बच्चा हूँ।
- आशीष रमेश







