शानदार बल्लेबाज की स्मृति शेष
मुझे आज भी याद है। मद्रास का टेस्ट मैच था भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 1986 मे और यह मैच इतिहास में दर्ज भी हुआ। यह क्रिकेट इतिहास का दूसरा टेस्ट मैच था जो टाई हुआ था। यहां इस मैच का जिक्र एक बल्लेबाज के लिए किया जो मद्रास की humdity से परेशान था और इसकी काट के लिए कोई पेय पदार्थ पी पी कर और वॉमिट कर कर के बैटिंग करता रहा और दोहरा शतक लगा दिया।
विपरीत हालात में विस्मयकारी पारी खेलने वाले इस शख्स ने आज तब और भी विस्मय में डाल दिया जब वह मुंबई में इस दुनिया से रुखसत हो गया। सिर्फ 59 साल की उम्र में। हार्ट अटैक से। जिन्होंने डीन जोन्स को खेलते देखा वह समझ सकते हैं कि वह कितना उपयोगी प्लेयर था। वह विव रिचर्ड्स जैसा विस्फोटक भले ही नहीं था लेकिन बैटिंग में अपनी तरह का एक determination था।
उन दिनों वन डे क्रिकेट लोकप्रियता की नई नई पायदानें छू रहा था। डीन जोन्स ने तीन नम्बर यानि वन डाउन बल्लेबाज के रूप अपना सिक्का जमाया। लंबे लंबे शॉट लगाए बिना स्कोर बोर्ड को तेजी से आगे बढाने में विकेटों के बीच तेजी से भागने की उनकी खूबी का भी बहुत योगदान था। यह कहना गलत नहीं होगा कि उस दौर में वह वन डे क्रिकेट में वन डाउन पर कदाचित सर्वश्रेष्ठ और आदर्श बल्लेबाज था। ऐसा जो डिलिवर भी करता था और डिपेंडब्ल भी था।
वन डे क्रिकेट में उनका बैटिंग औसत लगभग 45 रन था जिसे आज भी उत्कृष्ट माना जा सकता है। कई बड़े नामी गिरामी बल्लेबाज इससे पीछे पाए जाते हैं। टेस्ट मैच में औसत 47 था जिसे भी बेहतरीन कहा जाएगा। टेस्ट में 11 व वन डे में सात शतक उन्होंने जड़े। स्पिनर्स के खिलाफ बढ़िया फुवर्क था खासकर भारत या एशियाई विकेटों पर। जोन्स बेहतरीन फील्डर भी थे। घरेलू क्रिकेट में विक्टोरिया और इंग्लैंड में डर्बीशायर व डरहम के लिए खेले।
बीते कई सालों से वह कमेंट्री से जुड़े थे और यहां भी उन्होंने मैदान की तरह अपनी छाप छोड़ी। एक शानदार क्रिकेटर का यूं अचानक जाना निःसन्देह क्रिकेट प्रेमियों के लिए झटका है। – राज बहादुर सिंह की वॉल से







