बेटियां रोटियां पकाती हैं,
बेटियां हौसला बढ़ाती हैं।
होये जब रेप और मर जायें,
लाखों बापों को दहलाती हैं।
बेटियां खेतों में काम करती हैं,
ये अंतरिक्ष की उड़ान भरती हैं।
घर की रौनक हैं घर चलाती हैं,
घर का खर्चा भी ये चलाती हैं।
इंदिरा बन कर देश चलाती हैं,
निर्मला बनकर बजट बनाती हैं।
ये गोबर के कंडे बनाती हैं,
ममता बनके प्रदेश चलाती हैं।
ये पढ़ती हैं और पढ़ाती हैं,
सड़क पर झाड़ू भी लगाती हैं।
टेनिस हाथ लगे तो सानिया हो जायें,
गीत गायें तो लता मंगेशकर बन जायें।
ये रेप और मौत के बाद भी कुछ दे जायें,
पच्चीस लाख, मकान और नौकरी दिलायें।
बड़ी ताकत है तेरी मौत मे भी बेटी !
रेप का शिकार होकर कोई निर्भया जब मौत को गले लगाये,
तो साठ साल राज करने वाली ताकतवर हुकुमत भी चली जायें।। – नवेद शिकोह







