ऊर्जामंत्री ने दिए उच्च स्तरीय जाँच एव दोषी अभियंताओ व मीटर निर्माता कंपनी के खिलाफ कठोर कार्यवाही के निर्देश और 15 दिन में तलब की रिपोर्ट
स्मार्ट मीटर तेज चलता है इसकी शिकायत पूरे देश में उपभोक्ताओ की जुबान पर बात आम है लेकिन आज तक किसी भी प्रदेश में स्मार्ट मीटर तेज चलने की जाँच का खुलासा केवल इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि जो भी उच्चाधिकारी इस प्रोजेक्ट में लगे, वह सब मीटर निर्माता कंपनी की वकालत करने में मसगूल रहे।
बता दें कि उपभोक्ता परिषद की शिकायत पर वर्ष 2019 में ही राजधानी लखनऊ में स्मार्ट मीटर कई गुना तेज चलता पकड़ा गया था जिसकी दो बार जाँच हुई और दोनों बार तेज चलता मिला लेकिन उच्चाधिकारियो में मामले को रफादफा कर रातों रात उपभोक्ता के मीटर बदल दिए गए।
इस मामले की दबायी गयी रिपोर्ट को 1 साल बाद उपभोक्ता परिषद ने खोज निकाला और उसको लेकर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा नेे आज प्रदेश के ऊर्जामंत्री श्री श्रीकांत शर्मा से शक्तिभवन उनके कार्यालय में मिलकर दबाई गयी तेज स्मार्ट मीटर की पूरी रिपोर्ट उनके सामने रखते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की मांग उठाई।

इस गंभीर मामले में ऊर्जा मंत्री ने मामले की गम्भीरता को देखते हुए तत्काल अपर मुख्य सचिव ऊर्जा को यह लिखित निर्देश जारी किया कि स्मार्ट मीटर लगने के उपरांत कई गुना बढ़ी यूनिट पकड़े जाने के बाद भी प्रकरण को दबाना और उसे उच्च स्तर पर न भेजना गंभीर मामला है। उन्होंने तत्काल पूरे मामले की बिंदुवार उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर उपभोक्ता हित में जाँच कराकर दोषी अधिकारियों व स्मार्ट मीटर निर्माता कंपनी के खिलाफ कठोर कार्यवाही करते हुए 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
यह था पूरा मामला:
बता दें कि स्मार्ट मीटर वर्ष 2018 अक्टूबर में लगना शुरू हुए थे। राजधानी लखनऊ के ठाकुरगंज अपट्रॉन व कुछ अन्य क्षेत्रों से यह काम जब शुरू हुआ, उसी वक्त उपभोक्ता परिषद ने यह मामला नियामक आयोग व मीडिया में उठाया था कि मीटर तेज चलने की शिकायत उपभोक्ता कर रहे है इसकी क्या सत्यता की जाँच होना बहुत जरूरी है क्योंकि यह उपभोक्ताओ की विश्वसनीयता का सवाल है! इसलिए इस पूरे मामले पर मध्यांचल व पावर कार्पोरेशन को आगे आकर उपभोक्ताओ की शंका का समाधान करना चाहिए इसके बाद पावर कार्पोरेशन के निर्देश पर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने वर्ष 2019 में यह आदेश जारी किया कि किन्ही दो उपभोक्ताओ के परिषर में जहा स्मार्ट मीटर लगा हो वह चेक मीटर लगाकर यह देखा जाय की पुराने लगे मीटर की अपेक्षा कही स्मार्ट मीटर तेज तो नहीं चल रहे ?

और फिर लेसा के अपट्रॉन व ठाकुरगंज क्षेत्र में मध्यांचल कंपनी के निर्देश पर पांच उपभोक्ताओ के घर पर स्मार्ट मीटर के पैरलल में चेक मीटर एक अच्छी कंपनी का लगाया गया चौकाने वाला मामला यह आया कि ठाकुरगंज क्षेत्र में 3 उपभोक्ताओ के स्मार्ट मीटर कई सौ गुना तेज चलते पाये गये पहली बार जब 24 दिन के लिए जब उपभोक्ता के घर में चेक मीटर लगा तो उपभोक्ता हसींन खा जिनके स्मार्ट मीटर में 550 रीडिंग आयी और चेक मीटर में 67 यानी 483 यूनिट अधिक दूसरे उपभोक्ता श्रीमती तारावती जिनके स्मार्ट मीटर में 868 रीडिंग आयी और चेक मीटर में 29 यानी 839 यूनिट अधिक तीसरे उपभोक्ता श्री लाल बहादुर सिंह जिनके स्मार्ट मीटर में 877 रीडिंग आयी और चेक मीटर में 59 यानी 818 यूनिट अधिक फिर क्या था ?
अधिकारयों के जब फूल गए हाथ पावं:
अब मामले को कैसे दबाया जाय फिर दोबारा इन्ही उपभोक्ताओ के घर फिर चेक मीटर 4 से 5 दिन के लिए लगाया गया फिर क्रमशा उपभोक्ता हसींन खा के यंहा 224 यूनिट अधिक आयी उपभोक्ता श्रीमती तारावती के यंहा 419 यूनिट अधिक उपभोक्ता श्री लाल बहादुर सिंह के यंहा 146 यूनिट अधिक फिर आनन -फानन में मामला दबा दिया गया और उपभोक्ता के मीटर बदलवा दिए गये सबसे बड़ी बात यह है की इन सभी उपभोक्ताओ का भार भी कई गुना जम्प किया था। सवाल यह है की स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट ओपेक्स मोडल पर है अगर इसमे कमिया आ रही है तो विभाग के अभियंताओ को उपभोक्ताओ के साथ खड़ा होना चाहिए लेकिन दुर्भाग्य यह हेे कुछ उच्चाधिकारी ईईएसएल व मीटर निर्माता कंपनी के साथ खड़े दिखते है ।







