- ग्रामीण क्षेत्र में ट्रांसफार्मरों की आडिट व ग्रामीण उपभोक्ताओं के विद्युत भार बढ़ाने की योजना पर उपभोक्ता परिषद ने पावर कार्पोरेशन के तकनीकी विशेषज्ञों को दिखाया बड़ा आइना, कहा विशेषज्ञों को डायवर्सिटी फैक्टर1अनुपात1का नहीं है ज्ञान।
- उपभोक्ता परिषद का बड़ा खुलासा पावर कार्पोरेशन के सिस्टम की क्षमता केवल 3 करोड़ 79 लाख किलोवाट, वहीं विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा लिया गया कुल भार 4 करोड़ 65 लाख किलोवाट।
- बिजली कम्पनियां पहले अपने सिस्टम का बढ़ायें लोड फिर करें उपभोक्ताओं के भार बढ़ाने की बात।
- पावर कार्पोरेशन का सिस्टम पूरी तरह मिस मैच तकनीकी विशेषज्ञों की फौज को कब होगा यह ज्ञान?
लखनऊ 27 अगस्त। जहां नियामक आयोग में वर्ष 2017-18 के लिये ग्रामीण व किसानों की बिजली दरों में पावर कार्पोरेशन द्वारा व्यापक वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया है, वहीं पावर कार्पोरेशन ने जब से पावर फाॅर आल का एग्रीमेन्ट किया है तब से कहीं कोई घाटे की बात उठती है तो उसका ठीकरा गांव की जनता पर ही फोड़ा जा रहा है। विगत दिनों 18 घण्टे सप्लाई के नाम पर ग्रामीण उपभोक्ताओं की दरों में 350 प्रतिशत वृद्धि प्रस्तावित कर दी गयी। दो दिन पूर्व अब पावर कार्पोरेशन ने एक नया पैंतरा चल दिया है, कहा ग्रामीण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ट्रांसफार्मर ओवर लोड होकर फुंक रहे हैं, ऐसे में ट्रांसफार्मरों का आडिट कराया जायेगा और उसके आधार पर ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं के लोड भी बढ़ाये जायेंगे।
उपभोक्ता परिषद पावर कार्पोरेशन को बताना चाहता है कि पहले अपने सिस्टम का लोड बढ़ा लो, उसके बाद हमारे उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाने की बात करो। वर्तमान में पूरे प्रदेश में सिस्टम पूरी तरह अधिभारित है, उपभोक्ताओं द्वारा लिये गये संयोजित भार के मुताबिक बिजली कम्पनियों का सिस्टम नहीं है। पूरा सिस्टम मिस मैच कर रहा है और ऐसे में उसका ठीकरा उपभोक्ताओं पर फोड़ना उचित नहीं है। गांव की जनता का विद्युत दर प्रति किलोवाट माना जाता है इसलिए पावर कार्पोरेशन अभी से किलोवाट ज्यादा कर चोर दरवाजे से पुनः बिजली दरों में एक और वृद्धि कराने के लिये प्रयासरत् है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आज उपभोक्ता परिषद जो खुलासा करने जा रहा है, उससे पावर कार्पोरेशन के तकनीकी विशेषज्ञों की आंख खुल जायेगी वास्तव में उन्हें अभियान किस स्तर पर चलाने की जरूरत है? यह सोचने के लिये मजबूर होना पड़ेगा। पावर फार आल में पावर कार्पोरेशन ने माना है कि पूरे प्रदेश में 33 केवी स्तर पर वितरण ट्रांसफार्मरों की कुल क्षमता जो वर्तमान में है, वह लगभग 44677 एमवीए है। यदि इसको किलोवाट में निकाला जाये तो यह लगभग 3 करोड़ 79 लाख किलोवाट होगा। वहीं पूरे प्रदेश में 31 मार्च, 2017 तक कुल विद्युत उपभोक्ताओं की जो संख्या है, वह लगभग 1 करोड़ 80 लाख है और उनके द्वारा लिया गया कुल स्वीकृत भार लगभग 4 करोड़ 65 लाख किलोवाट है, अर्थात पावर कार्पोरेशन की क्षमता और उपभोक्ताओं द्वारा लिये गये भार के बीच लगभग 1 करोड़ किलोवाट का अन्तर है, ऊपर से इसी सिस्टम पर लगभग 25 प्रतिशत बिजली चोरी का लोड। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि बिजली चोरी का लोड भी इसी सिस्टम पर लगभग 1 करोड़ किलोवाट के बराबर होना तय है। ऐसे में अब पूरी तरह यह सिद्ध हो गया है कि पूरा सिस्टम मिस मैच है और उसमें बड़े पैमाने पर नये तरीके से सुदृढ़ीकरण करने की जरूरत है। पावर कार्पोरेशन की क्षमता बहुत कम है, पीक आवर्स में जब उपभोक्ता फुल लोड चलाता है उस दौरान जैसा कि केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण का भी मानना है कि डायवर्सिटी फैक्टर 1 अनुपात 1 होना स्वाभाविक है। ऐसे में प्रदेश की बिजली कम्पनियों को सबसे पहले अपने सिस्टम को सुदृढ़ करने के लिये अपना भार बढ़ाना होगा, फिर उपभोक्ताओं के भार बढ़ाने की बात होनी चाहिए।







