Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Thursday, July 9
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»फिल्म

    जागते रहो!  

    ShagunBy ShagunAugust 11, 2021 फिल्म No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 878
    वीर विनोद छाबड़ा 
    राजकपूर की बनाई फ़िल्में याद करें। आग, बरसात, आवारा, आह, बूट पोलिश, श्री 420, जागते रहो, जिस देश में गंगा बहती है, मेरा नाम जोकर, कल आज और कल, बॉबी, धरम करम, सत्यम शिवम् सुंदरम, प्रेम रोग, राम तेरी गंगा मैली।  हर फिल्म समाज के दकियानूसी रीति-रिवाज़ों और व्यवहार पर कटाक्ष करती हैं, कुछ पॉजिटिव मैसेज देती हैं। राजकपूर की अपनी एक स्टाइल थी. बड़े स्तर की फ़िल्में बनाते थे। बड़े और मंजे हुए कलाकार लेते थे। बड़ी पब्लिसिटी। वो अपने दौर के हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े शोमैन थे।
    घटनाओं को देखने, समझने और समझाने का सबसे अलग नज़रिया था। दुनिया के सबसे बड़े कॉमेडियन चार्ली चैपलिन की भांति गंभीर व्यंग्य करते थे। बाज़ इतिहासकार उन्हें भारतीय सिनेमा का चार्ली चैपलिन भी मानते हैं। हो सकता है सब लोग राजकपूर की बाज़ फिल्मों के कंटेंट्स से इत्तिफ़ाक़ न रखते हों। इनमें हम भी शामिल हैं। लेकिन, हम उनकी ‘जागते रहो’ (1956) को सौ फ़ीसदी नंबर देते हैं, क्लासिक की श्रेणी में रखते हैं। हम इसे आल टाइम दस श्रेष्ठ हिंदी फिल्मों में जगह देंगे।
    ‘जागते रहो, के जिस किरदार को राजकपूर ने अदा किया है, उसका कोई नाम नहीं है, बस वो गरीब इंसान है, भोला-भाला सा, मैले-कुचले कपड़े और घास की तरह उगी चेहरे पर दाढ़ी. दरिद्रता उसकी पहचान है। गांव से शहर आया है, रोज़ी-रोटी की तलाश में. हाथ में सिर्फ चने हैं। एक बाज़ारू कुत्ता उसका साथी बनता है. उसे प्यास लगती है। वो पानी की तलाश में इधर-उधर भटकता है। एक सिक्योरिटी गार्ड उसे दौड़ा देता है। तब उसे अमीर मोतीलाल मिलते हैं, हाथ में बोतल, नशे में टुन्न…ज़िंदगी ख़्वाब है…उनके पास पानी नहीं शराब है।
    मगर गरीब शराब नहीं पीता है। मोती बाबू का पर्स गिरता है तो गरीब उठा कर वापस कर देता है। मोती बाबू हैरान होते हैं, तुम्हें अपनी पत्नी से मिलाना चाहिए हूं ताकि वो देखे, जो आदमी ड्रिंक नहीं करता, स्मोक नहीं करता, चोरी नहीं करता वो ऐसा होता है, बिलकुल तुम्हारे जैसा। मोती बाबू उसे कुछ रूपए देते हैं। गरीब फटी-फटी आँखों से रूपये देखता है, इतना रुपया उसने एक साथ कभी देखा ही नहीं है, तभी एक टैक्सी रूकती है। मोती बाबू उसमें सवार हो लेते हैं और टैक्सी ड्राइवर राज से रूपए छीन लेता है।
    गरीब को एक बहुमंज़िला रिहाईशी बिल्डिंग दिखती है। उसके परिसर में एक नल है, टप-टप पानी की बूंदें नीचे गड्ढे में जमा हो रही हैं। कुत्ता लपक कर विशाल गेट के एक तंग झरोखे अदंर प्रवेश करता है। लपालप पानी पीता है और फिर गरीब की ओर देखता है, मानो उसे गाईड कर रहा है, पानी इधर है. गरीब की मनचाही मुराद पूरी होने को है। टोंटी खोलने जा ही रहा है कि अचानक वही सिक्योरिटी गार्ड उसे चोर समझ कर चोर-चोर चिल्लाने लगता है। गरीब घबड़ा कर उस रिहाईशी बिल्डिंग में घुस जाता है। बिल्डिंग में शोर मचता है, चोर चोर। सब बाहर निकल आते हैं ,किसी के हाथ में बैडमिंटन वाला रैकेट है तो किसी के हाथ में डंडा और कोई कपड़े धोने वाली पाटी लिए है। एक यूथ वालंटियर ब्रिगेड भी है जिसके लीडर ऊर्जा से भरपूर इफ्तिकार हैं। इसमें कई लोग डरपोक भी हैं, चोर के पास हथियार हुआ तो? इसलिए वो पीछे-पीछे चलते हैं।
    वालंटियर हर माले पर फैल जाते हैं, चोर की तलाश में। गरीब एक घर में छिप जाता है। वहां प्रदीप कुमार पहले से ही मौजूद है। वो अपनी प्रेमिका स्मृति बिस्वास से मिलने आया है. गरीब को देख स्मृति की चीख निकल जाती है जिसे सुन कर वालंटियर्स कमरे में प्रवेश करते हैं। प्रदीप वालंटियर्स के साथ मिल जाता है, गरीब उसके पीछे-पीछे दुबका रहता है। प्रदीप की भी मजबूरी है गरीब को बचाना, अन्यथा वो खुद भी फँस सकता है। स्मृति का पिता राशीद खान भी कमरे से बाहर निकलता है वो प्रदीप को देख कर भड़क जाता है, तुम यहां क्या कर रहे हो? प्रदीप सफाई देता है, चीख सुनकर सबके साथ मैं यहां आ गया. गरीब की जान बचती है।
    मगर बात यहां खत्म नहीं होती है। एक के बाद एक कई घटनाएं होती हैं। कभी गरीब घिर जाता है, मगर जैसे तैसे बच निकलता है। एक बार उसे मुर्दा भी बनना पड़ता है। इस बीच पुलिस भी बुला ली जाती है। एक घर से गोली चलने की आवाज़ आती है। सब लोग उधर ही भागते हैं। पता चलता है कि वहां एक आदमी ने चूहे से डर कर बन्दूक चलाई है। इंस्पेक्टर को शक होता है। वो दूसरे कमरे की तलाशी लेता है। वहां शराब की कई अवैध पेटियों रखी मिलती हैं। इसी तरह एक इज़्ज़तदार नेता के घर में नकली नोट छापने का धंधा पकड़ में आता है जिसमें एक नकली डॉक्टर नाना पालसीकर भी लिप्त पाया जाता है। गरीब ने ये सब देख लिया है। नेता उसके पीछे हाथ धोकर पड़ जाता है। अवैध जुआघर भी है। आखिर में गरीब बिल्डिंग की छत पर पहुंच जाता है। उसे मारने के लिए नकली नोट वाले नेता के दो आदमी वहां मौजूद हैं। एक भांगड़ा पार्टी का भी मज़ेदार प्रसंग है…ओ मैं कोई झूठ बोल्या…डंडों से लैस भीड़ भी उसका पीछा करती हुई छत पर पहुंच जाती है।
    सब उसे गरीब को मारने पर उतारू हैं। तब गरीब भी डंडा उठा कर सबको ललकारता है। पूरी फिल्म में गरीब पहली बार चीखता है, हां मार डालो मुझे। मेरा कसूर क्या है? यही न कि प्यास बुझाने के लिए दो बूंद पानी चाहिए। तभी गरीब पर नेता का आदमी गोली चलाता है। गरीब को लगती नहीं है, मगर भगदड़ मच जाती है। गरीब मौके का फायदा उठा कर भाग निकलता है। वो फिर एक घर में घुस जाता है। वहां एक छोटी बच्ची डेज़ी ईरानी मिलती है. उससे प्यारी प्यारी बातें करती है। उसी समय बैकग्राउंड से गाने की आवाज़ आती है…जागो मोहन प्यारे जागो…यानी सवेरा होने को है, नवप्रभात.  डेज़ी दरवाज़ा खोल देती है। गरीब बाहर निकल जाता है।
    अब सब नार्मल हो चुका है. दारू का अवैध कारोबारी, नकली नोट छापने वाले, नकली डॉक्टर और अवैध जुआघर चलाने वाले पकड़े जा चुके हैं। जागो मोहन प्यारे…और कोई नहीं नरगिस गा रही है. फिल्म में पहली और आखिरी बार दिखाई दीं। राजकपूर के बैनर तले भी ये उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई. वो पौधों को पानी दे रही है, गरीब अपना चुल्लू लगा देता है. उसकी प्यास बुझ जाती है। इसी के साथ एक रात की कहानी ख़त्म होती है। साथ ही पोल खुलती है, ये मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग जैसा दिखता है वैसा है नहीं, कई मतलब परस्त भी हैं। किसी ने कह दिया, तेरा कान कौवा ले गया तो कान चेक नहीं करेगा, डंडा लेकर कौवे के पीछे दौड़ेगा। ये वर्ग भीड़तंत्र और भेड़चाल में यकीन रखता है। जिसने ये फ़िल्म देखी है उसे ये पढ़ कर नॉस्टाल्जिया होगा और जिसने नहीं देखी वो ज़रूर देखे, हमारी सलाह है।
    ‘जागते रहो’ में एक राजकपूर को छोड़ कोई बड़ा आर्टिस्ट नहीं है। सब अपनी जगह ठीक हैं और सबसे बेस्ट तो राजकपूर हैं। झाड़ की तरह उगी दाढ़ी से चेहरे से एक्सप्रेशन देना आसान नहीं होता है। उनकी आंखों में व्याप्त भय ही सब कुछ बयां करता है, पूरे परफेक्शन के साथ। हम इसे राजकपूर की सर्वश्रेष्ठ परफॉरमेंस मानते हैं। डायरेक्टर राज नहीं हैं, बंगाल के शम्भू मित्रा और अमित माईत्रा हैं, जिन्होंने ओरिजिनल बंगाली वर्ज़न ‘एक दिन रात्रि’ भी डायरेक्ट किया था.
    राजकपूर ने अपने पसंदीदा शंकर-जयकिशन के स्थान पर सलील चौधरी को संगीत के लिए चुना, क्योंकि वो फिल्म पर बंगाल की पृष्ठभूमि का टच बरक़रार रखना चाहते थे. और सलील दा बिलकुल निराश नहीं करते हैं। ‘जागते रहो’ को 1957 में चेकोस्लोवाकिया में आयोजित कार्लोवरी फिल्म फेस्टिवल में क्रिस्टल ग्लोब ग्रैंड प्रिक्स अवार्ड भी मिला. अंत में हम उन सबसे शत-प्रतिशत सहमत हैं जो ‘जागते रहो’ को राजकपूर की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि मानते हैं।

    Shagun

    Keep Reading

    Nikita Rawal Honoured by Varun Dhawan Varun Dhawan Recognises Nikita Rawal's New Milestone

    वरुण धवन के हाथों सम्मानित हुईं निकिता रावल

    The mystery behind 'Love Lottery' unfolds in cinemas on September 18

    18 सितंबर को खुलेगा ‘लव लॉटरी’ का राज! कोर्टरूम, मर्डर और सस्पेंस का धमाकेदार मेल

    Neeru Sharma's 'Bandra Boy' makes history in New York

    नीरू शर्मा की ‘बांद्रा बॉय’ ने न्यूयॉर्क में रचा इतिहास

    Ramlal: The flute wizard to whom Bollywood never truly did justice

    रामलाल: बांसुरी के जादूगर जिन्हें बॉलीवुड ने कभी पूरा न्याय नहीं दिया

    पहली बार अपनी कहानी खुद सुनाएंगी ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी

    'Rajmahal Bana Doon Patna Mein' Creates a Sensation on Social Media

    ‘राजमहल बना दूँ पटना में’ ने 10 दिनों में मचाया सोशल मीडिया पर तहलका

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    A silent scream! Congratulations! Congratulations! Congratulations!

    एक मौन चीख! अभिनंदन! अभिनंदन!अभिनंदन!

    July 9, 2026
    A new form of corruption: retired officials also found hoarding ill-gotten wealth.

    भ्रष्टाचार का नया रूप, अब रिटायर्ड अधिकारियों में भी लूट का खजाना

    July 8, 2026
    Major success for Chinhat Police: 2-year-old child, missing from a hotel, safely recovered from Sitapur.

    चिनहट पुलिस की बड़ी कामयाबी: होटल से लापता 2 वर्षीय मासूम सीतापुर से सकुशल बरामद

    July 8, 2026
    Nikita Rawal Honoured by Varun Dhawan Varun Dhawan Recognises Nikita Rawal's New Milestone

    वरुण धवन के हाथों सम्मानित हुईं निकिता रावल

    July 8, 2026
    ChatGPT, Gemini, Claude, DeepSeek AI

    एआई मौलिक सोच को चुनौती दे रहा है: क्या हम ‘सोचने’ की क्षमता खो रहे हैं?

    July 8, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading