पत्रकारिता से निर्देशन तक का सफर, पहली फिल्म पर अंतरराष्ट्रीय सम्मान
मुंबई: वर्षों तक बॉलीवुड की खबरों को अपनी कलम से दुनिया तक पहुंचाने वाली वरिष्ठ पत्रकार नीरू शर्मा अब कैमरे के पीछे अपनी कहानियों से दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर रही हैं। उनकी पहली निर्देशित फिल्म ‘बांद्रा बॉय’ ने न्यूयॉर्क के दो प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में धमाल मचा दिया है।
21 मिनट की थ्रिलर ने जीता ग्लोबल सम्मान
महज 21 मिनट की इस हिंदी थ्रिलर को फ्रेम्स ऑफ न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल में सेमीफाइनलिस्ट चुना गया, वहीं न्यूयॉर्क इंटरनेशनल वुमेन फेस्टिवल में इसे अवॉर्ड विनर का सम्मान मिला। किसी नए निर्देशक के लिए यह उपलब्धि कमाल की है, खासकर जब यह उनकी डेब्यू फिल्म हो।
मीडिया, सच और समाज की बारीक रेखा
‘बांद्रा बॉय’ सिर्फ थ्रिलर नहीं है। फिल्म मीडिया, सोशल परसेप्शन और सच्चाई के बीच की उस पतली रेखा की पड़ताल करती है जहां सुर्खियां अक्सर सच से पहले फैसला सुना देती हैं। यह सवाल उठाती है कि क्या समाज किसी व्यक्ति को उसके असली सच जाने बिना ही अपनी राय के आधार पर दोषी या बेगुनाह करार दे देता है?
दो दशकों का अनुभव बना कहानी की ताकत
नीरू शर्मा दो दशक से अधिक समय से बॉलीवुड और मनोरंजन पत्रकारिता का हिस्सा रही हैं। अनगिनत विवादों, घटनाओं और मानवीय कहानियों को करीब से देखने का उनका अनुभव ही इस फिल्म की मजबूत नींव बना।
फिल्मकार सुभाष घई की व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल से निर्देशन का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने यह नई राह चुनी। पत्रकारिता से फिल्म निर्देशन तक का उनका सफर आज इंडस्ट्री के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
नीरू शर्मा का बयान:
“एक निर्देशक के रूप में मेरी पहली फिल्म को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना बेहद उत्साहजनक है। ‘बांद्रा बॉय’ उन अनुभवों और सवालों से जन्मी है जिन्हें मैंने सालों तक मीडिया जगत को करीब से देखते हुए महसूस किया। यह सम्मान मुझे और बेहतर, विचारोत्तेजक कहानियां कहने के लिए प्रेरित करता है।”
कलाकार और क्रू मुख्य भूमिका:
- अहवान कुमार
- महत्वपूर्ण भूमिका: धर्मेंद्र गोहिल (गुजराती-मराठी सिनेमा के चर्चित अभिनेता)
- अन्य कलाकार: लोचन बारसगड़े, यश पेडणेकर, शाम थोंबरे, पवन तिवारी, ऐश्वर्या मनोहर, हिमांशी मंडालिया और नंदिनी शर्मा।
निर्माता: राजीव पराशर
संपादन: संदीप कुरुप (‘मुबारकां’, ‘सड़क 2’, ‘क्रैक’)
सिनेमैटोग्राफी: आयुष शाह
बैकग्राउंड स्कोर: कौशल महावीर
बांद्रा बॉय की यह सफलता सिर्फ एक फिल्म की जीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्र सिनेमा की उस नई सोच का प्रतीक है जो स्थानीय कहानियों को वैश्विक मंच पर ले जाने का साहस रखती है। नीरू शर्मा अब खबरें लिखने वाली पत्रकार से ऐसी कहानियां गढ़ने वाली फिल्ममेकर बन चुकी हैं जो दुनिया का ध्यान खींच रही हैं।






