वीर विनोद छाबड़ा
दुनिया के महान कॉमेडियन, मानवतावादी और फिलॉस्फर चार्ली चैपलिन की फिल्मों को समझने के लिए भाषा की ज़रूरत कभी नहीं पड़ी. सिर्फ़ व्यंग्य और कटाक्ष की समझ रखने का सौंदर्यबोध चाहिए. उनकी कुछ मशहूर फ़िल्में हैं – दि ग्रेट डिक्टेटर, सिटी लाइट्स, मॉडर्न टाइम्स, दि गोल्ड रश, दि डॉग्स लाइफ, दि बैंक आदि.
ट्रेजडी और चार्ली का चोली-दामन साथ रहा. यह साथ उनकी पैदाइश से लेकर ज़िंदगी के आख़िर तक चला. मुफ़लिसी के कारण उन्हें अपनी जन्मभूमि इंग्लैंड छोड़नी पड़ी तो अपने कर्मों के कारण कर्मभूमि हॉलीवुड. उन पर कम्युनिस्ट रूस के प्रति सहानुभूति रखने का आरोप लगा. उन्हें दोबारा अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गयी.
16 अप्रैल 1889 को इंग्लैंड में जन्मे चार्ली ने फ़िल्में हॉलीवुड में बनाईं. उन्हें सर्वहारा का नायक कहा गया. चार्ली की मृत्य 25 दिसंबर 1977 को हुई. उन दिनों वो स्विट्ज़रलैंड में थे. उन्हें वहीं दफ़न भी किया गया. मगर 1 मार्च, 1978 को दो बेरोज़गार प्रवासी, पोलैंड का रोमन वार्ड्स और बुल्गारिया का गंताचो गनेव, उनका कॉफिन चुरा कर ले भागे. उनका उद्देश्य चार्ली के वारिसान से धन ऐंठना था. लेकिन पुलिस ने खासी मशक्कत के बाद उन दोनों प्रवासियों को धर दबोचा. चार्ली का कॉफिन उन्होंने अन्यत्र ज़मीन में दफना रखा था.
पुलिस ने उनका कॉफिन खोज निकाला और विधिवत वापस उनकी कब्र में दफ़न दिया. इस बार उनकी कब्र के चारों ओर कंक्रीट भर कर एक मोटी दीवार खड़ी कर दी गयी, ताकि दोबारा कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके।







