भूख से जूझ रहे बच्चे और बड़े थोड़े से चावल के लिए भी मांग रहे भीख, मानवीय सहायता पर रोक के बाद गाजा में भुखमरी का आलम
नई दिल्ली। इजरायल ने गाजा पट्टी में मानवीय सहायता रोक दी है, जिससे वहां भुखमरी का आलम है। बच्चों से लेकर बड़ों तक भोजन पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आलम यह है कि लोग थोड़े से चावल के लिए भी भीख मांग रहे हैं। खाने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हो रही है, जिसके चलते उन्हें धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ रहा है।
दक्षिणी गाजा के खान यूनिस में शुक्रवार को भोजन पाने के लिए संघर्ष के चलते सामुदायिक रसोई पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे वहां अफरातफरी का माहौल बन गया। निवेन अबू अरार नामक 33 वर्षीय महिला वहां समय पर नहीं पहुंच सकी, जिसके चलते उसे खाली हाथ लौटना पड़ा। उसकी आखों में आंसू भरे थे। अबू अरार आठ बच्चों की मां है और उसका नौवां बच्चा (लड़का ) 2023 की युद्ध की शुरुआत में इस्राइली हमले में मारा जा चुका है। छोटे बच्चे को गोद में लिए अबू अरार ने कहा कि आखिर कब तक जिंदगी ऐसी ही रहेगी।
हम धीरे- धीरे मर रहे हैं। हमने डेढ़ महीने से रोटी नहीं खाई है। आटा नहीं है। हमें नहीं पता कि क्या करना है । बीते दो महीने से इजरायल ने गाजा में खाना, दवाइयां और अन्य जरूरी चीजें भेजना बंद कर दिया है। सहायता समूहों ने चेतावनी दी है कि गाजा की नागरिक आबादी भुखमरी का सामना कर रही है। वहीं, इजरायल का कहना है कि उसने यह सब इसलिए किया है, ताकि आतंकवादी संगठन हमास पर बंधकों की रिहाई के लिए दबाव डाला जा सके। वहीं, सहायता समूहों का कहना है कि मानवीय सहायता रोकना सामूहिक दंड है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, गाजा की लगभग पूरी आबादी मानवीय सहायता पर निर्भर है। गोदाम खाली हैं, सामुदायिक रसोई बंद हो रही हैं, और परिवार भोजन छोड़ रहे हैं। गाजा में ऑक्सफैम के मीडिया समन्वयक गदा अल हद्दाद ने बताया कि 25 किलोग्राम आटे का एक बैग अब 1,300 शेकेल ( 360 अमेरिकी डॉलर) में मिलता है। उन्होंने बताया कि मां अपने बच्चों को दिन में एक बार यानी रात का खाना खिलाती हैं, जिससे कि वह सुबह उठकर भूखे रहने की शिकायत न कर सकें।







