याद है मुझको माँ कहती थी…
अभी तुम मुझे समझ ना पाओगी,
उस दिन होगा एहसास तुम्हे मेरा..
जिस दिन तुम खुद माँ बन जाओगी..।।
अभी तो जी चुरा लो काम से अपना..
पर बडे होकर भला कहाँ जाओगी,
हर बहाना तुम्हारा सर आँखों पर आज तो…
बाद में खुद से कहाँ तक भाग पाओगी।।
अल्हड़पन की उम्र होती है बहुत ही छोटी..
आज तो मासूमियत से ढक जाओगी,
पड़ेगा जब जिम्मेदारियों का बोझ उठाना..
तब माँ की दी हुई हर सीख दोहराओगी।।
नाज और नखरे, ज़िद मनुहार, हर बात पर गुस्सा..
रूठना मनाना, देर से उठना, कितना मुँह फुलाओगी,
याद करोगी अपनी माँ का वो हर समर्पण..
जब बच्चों संग गहरी नींद के लिए तरस जाओगी।।
अभी जो ये आलम है तुम्हारा लापरवाही का…
क्या खुद का ख्याल तुम रख भी पाओगी,
वक्त रहते मेरी नज़र के सामने समझ जाओ तुम बेटा…
बाद मे क्या हर बात पर माँ को बुला पाओगी ।।
ठहाके लगाना, पैसे गँवाना, बातों को हवा में उडाना…
पापा के लाड़ का कब तक फायदा उठाओगी,
अब तो कुछ गम्भीर बनो तुम ज़िन्दगी में..
कल दूसरे घर की लाज बन विदा हो जाओगी।।
डाँटती है पर, दुश्मन नही है माँ ये तुम्हारी..
खुद की गलती पर लड़ लोगी मुझसे, मुझे झुकाओगी,
कितनी फिक्र रहती है तुम्हारी हर एक पल..
इसकी बात की कद्र समय आने पर ही जान पाओगी।।
बचपन के मीठे किस्से, खेल अठखेलियाँ…
मन ही मन याद कर बार बार गुनगुनाओगी,
माँ है तुम्हारी प्रथम गुरू और पक्की सहेली भी…
जीवन के हर पथ पर साथ मुझे तुम पाओगी।।
ना भी रहूँ मै सदा साथ तुम्हारे तो चिंता न करना..
तुम सदा मेरी ही परछाई कहलाओगी,
क्या सिखाया है अब तक तुम्हे माँ ने तुम्हारी…
इस सवाल का फक्र से सामना कर पाओगी।।
माँ के आसरे पर तुम, हर मुश्किल को टेका लगाओगी…
अपने भले बुरे की मुझसे हमेशा सीख ही पाओगी,
कभी जो आई दुख परेशानी जीवन में…
मुड़ के देखोगी, माँ के आँचल की वही छाया पाओगी।।
मायका सदा रहेगा रोशन मुझसे तुम्हारा..
पास मेरे तुम मेरी बच्ची बन के ही आओगी,
उम्मीद है कहीं तुम देर न कर दो मुझे समझने में..
माँ के जीवित रहते माँ का अर्थ समझ जाओगी….!!!!
मातृ दिवस की शुभकामनाओं : कामिनी शर्मा, जयपुर से







