सिर्फ कहानियां नहीं असल जिंदगी के बयानात
लखनऊ, 23 मई 2025: प्रसिद्ध उर्दू कथाकार प्रो. नैय्यर मसूद के व्यक्तित्व और कृतित्व पर लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में गहन चर्चा हुई। उस्लूब आर्गनाइजेशन और उ.प्र. हिंदी संस्थान के निराला सभागार में हुए इस आयोजन में साहित्य अकादमी, दिल्ली द्वारा शुएब निजाम के लिखे मोनोग्राफ का विमोचन भी किया गया।
मुख्य अतिथि डा. अनीस अंसारी ने प्रो. मसूद की कहानियों को रोज़मर्रा की संवेदनाओं का जीवंत चित्रण बताया, जबकि लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व उर्दू विभागाध्यक्ष डा. अनीस अश्फाक ने उन्हें संवेदनशील लेखक करार देते हुए उनकी रचनाओं की ताजगी और भाषाई पकड़ की सराहना की। शुएब निजाम ने प्रो. मसूद को उर्दू और फारसी का आलिम बताते हुए उनकी अफसानों की ख्वाबनुमा शैली और अद्भुत कहानी कहने के अंदाज़ को रेखांकित किया।
उर्दू विद्वान शकील सिद्दीकी ने मसूद को पुराने लखनऊ के चित्रण और उत्तर-आधुनिकतावादी परंपरा के लिए जाना जाता बताया। प्रो. परवीन शुजाअत ने उनकी कहानियों की रवानी और ताजगी की चर्चा की, जो लखनऊ के पुराने दौर को जीवंत करती हैं। प्रो. बुशरा ने उनकी रचनाओं में मरती तहज़ीब के चित्रण को उभारा।
वक्ताओं ने मसूद की चर्चित रचनाओं जैसे मूरासिला, ताऊस चमन की मैना, गंजिफा और शीशा घाट की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में प्रो. मसूद के पुत्र डा. तिम्साल मसूद सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।







