नीतू सिंह
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राष्ट्रीय चंबल वन्य जीव विहार को इको-टूरिज्म के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बता दें कि राष्ट्रीय चंबल वन्य जीव विहार को इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए योगी सरकार ने कई पहल की हैं, जिनमें सफारी पार्क, कछुआ संरक्षण केंद्र, पौधारोपण और वन्य जीव गणना जैसे कदम शामिल हैं। ये प्रयास न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि जैव-विविधता और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूत कर रहे हैं।
पर्यटकों की बढ़ती संख्या: चंबल वन्य जीव विहार में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जिसके लिए योगी सरकार ने सुविधाओं का विस्तार किया है। पर्यटन शुल्क में वृद्धि न करने का निर्णय लिया गया है, ताकि अधिक से अधिक पर्यटक आकर्षित हों।
आइए अब बात करते हैं ‘चंबल’ की, जो कभी डकैतों और बीहड़ों की कहानियों के लिए जाना जाता था, आज अपनी प्राकृतिक समृद्धि और जैव-विविधता के कारण देश-विदेश में पहचान बना रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के त्रि-राज्य क्षेत्र में फैला राष्ट्रीय चंबल वन्य जीव अभयारण्य न केवल घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन जैसे लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण स्थल है, बल्कि पक्षी प्रेमियों के लिए भी एक स्वर्ग बन चुका है। योगी आदित्यनाथ सरकार की पहल से यह क्षेत्र इको-टूरिज्म का एक प्रमुख केंद्र बनने की राह पर है, जहां हर साल सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षी और देशी प्रजातियां डेरा डालती हैं।
पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना: 300 से अधिक प्रजातियां
भारत में पाई जाने वाली 1,200 से अधिक पक्षी प्रजातियों में से लगभग 500 प्रजातियां उत्तर प्रदेश में निवास करती हैं, और इनमें से 320 से अधिक प्रजातियां अकेले चंबल वन्य जीव विहार में देखी जा सकती हैं। यह अभयारण्य स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रजनन और आश्रय स्थल है। सर्दियों के आगमन के साथ ही अफगानिस्तान, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार, रूस और मध्य एशिया से हजारों प्रवासी पक्षी चंबल की स्वच्छ नदी और बीहड़ों में चार महीने तक अपना आशियाना बनाते हैं।
चंबल में पाए जाने वाले कुछ प्रमुख पक्षियों में शामिल हैं:
- ब्राह्मणी डक (सुर्खाब): अपने रंग-बिरंगे पंखों के कारण सबसे आकर्षक मानी जाती है।
- पेलिकन, फ्लेमिंगो, बार-हेडेड गूज: ये प्रवासी पक्षी सर्दियों में बड़ी संख्या में आते हैं।
- इंडियन स्किमर: यहाँ इनके घोंसले बड़ी संख्या में देखे जाते हैं, जो विश्व स्तर पर एक दुर्लभ दृश्य है।
- लिटिल कॉर्मोरेंट, ग्रे हेरॉन, कैटल इग्रेट, पेंटेड स्टॉर्क, लिटिल ग्रीब, व्हाइट-नेक्ड स्टॉर्क आदि।
- अन्य प्रजातियां: हॉक, होर्नबिल, मूरहेन, डायमर, नाइट बर्ड, और कई दुर्लभ कछुए।
चंबल की स्वच्छ नदी, रेतीले किनारे और बीहड़ों की प्राकृतिक संरचना पक्षियों के लिए आदर्श आवास प्रदान करती है, जिसे बर्डलाइफ इंटरनेशनल ने एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (IBA) के रूप में मान्यता दी है।
घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन का गढ़
1979 में स्थापित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को मुख्य रूप से गंभीर रूप से लुप्तप्राय घड़ियाल, लाल-मुकुट कछुए और गंगा नदी डॉल्फिन के संरक्षण के लिए बनाया गया था। यह देश का एकमात्र नदी-आधारित अभयारण्य है, जो 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैला है। चंबल नदी में घड़ियालों की सबसे बड़ी आबादी पाई जाती है, और ‘ग्रो एंड रिलीज प्रोग्राम’ के तहत इनका पुनर्वास किया जा रहा है। इसके अलावा, गंगा डॉल्फिन (गांगेय सूस) और आठ दुर्लभ कछुओं की प्रजातियां भी यहाँ संरक्षित हैं।
इको-टूरिज्म का उभरता केंद्र
उत्तर प्रदेश सरकार चंबल को इको-टूरिज्म के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पर्यावरणीय सुधार के लिए क्षेत्र को हरा-भरा करने, अवैध शिकार पर रोक लगाने और वाणिज्यिक मत्स्य पालन को समाप्त करने जैसे कदम उठाए गए हैं। इटावा के फिशर वन क्षेत्र में लॉयन सफारी पार्क, एलीफेंट सफारी पार्क, और तेंदुआ, लकड़बग्घा, भालू व हिरण सफारी पार्क की स्थापना की गई है, जो पर्यटकों के लिए अतिरिक्त आकर्षण हैं।
सर्दियों में पक्षी-निरीक्षण के लिए चंबल आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो रही है। नाव सफारी के माध्यम से पर्यटक घड़ियाल, डॉल्फिन और रंग-बिरंगे पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में देख सकते हैं। सरकार ने शिकार और पर्यावरणीय नुकसान को रोकने के लिए सख्त निगरानी और जागरूकता अभियान शुरू किए हैं।
पर्यटन के लिए आकर्षक विशेषताएं
पक्षी-निरीक्षण: 320+ पक्षी प्रजातियों के साथ, चंबल पक्षी प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए स्वर्ग है।
- नाव सफारी: चंबल नदी पर नाव यात्रा के दौरान घड़ियाल, डॉल्फिन और प्रवासी पक्षियों को करीब से देखने का अनुभव।
- प्राकृतिक सौंदर्य: बीहड़ों, रेतीले किनारों और स्वच्छ नदी का अनूठा लैंडस्केप।
- सफारी पार्क: इटावा में लॉयन और एलीफेंट सफारी का रोमांच।
- संरक्षण का अनुभव: घड़ियाल और डॉल्फिन संरक्षण कार्यक्रमों के बारे में जानने का अवसर।
- शांत वातावरण: शोर-शराबे से दूर, प्रकृति के बीच सुकून का अनुभव।
संरक्षण की चुनौतियां
चंबल अभयारण्य को प्रस्तावित रामसर स्थल के रूप में भी मान्यता मिली है, जो इसकी वैश्विक महत्व को दर्शाता है। हालांकि, अवैध रेत खनन, प्रदूषण और मानवीय अतिक्रमण जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इनसे निपटने के लिए सख्त कदम उठाए हैं, जिसमें स्थानीय समुदायों को संरक्षण में शामिल करना और पर्यावरण जागरूकता फैलाना शामिल है।
घड़ियालों का संसार दे रहा एक नई पहचान
राष्ट्रीय चंबल वन्य जीव अभयारण्य आज न केवल घड़ियालों का संसार है, बल्कि पक्षियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक अनमोल खजाना है। इको-टूरिज्म के माध्यम से यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान दे रहा है। अगर आप प्रकृति, पक्षियों और वन्य जीवन के रोमांच का अनुभव करना चाहते हैं, तो चंबल आपके लिए एक अविस्मरणीय गंतव्य है।
यात्रा पूर्व ध्यान रखने योग्य बातें : सर्दियों (नवंबर-फरवरी) में चंबल की यात्रा करें, जब प्रवासी पक्षी अपने पूरे रंग में नजर आते हैं। नाव सफारी के लिए पहले से बुकिंग करें और स्थानीय गाइड की मदद लें।







