संतवाणी : अजीत कुमार सिंह
दुनिया में सबसे अधिक कोई बलवान है तो वो है इच्छाशक्ति में दुनिया की हर चीज इसके माध्यम से तुम्हें मिल सकती है चाह होगी तो राह अपने आप मिल जाएगी वो हर चीज तुम्हें प्राप्त होती है जो तुम्हारे लिए जुनून बन जाती है। आगे बढ़ने की, महान बनने की, सफल होने की कुछ अलग करने की इच्छा जरूर रखो।
संसार के जितने भी साधन है वो इंसान के लिए ही बने हैं। तुमने अपने दोनों हाथ आँखों पर रख रखे हैं और चिल्ला रहे हो कि अँधेरा है अपने हाथ अलग करो, देखो चारों तरफ प्रकाश है कमजोर को कुछ भी नहीं मिलता साहसी को सब कुछ मिलता है कायरता के अंधेरे से बाहर निकलो और आगे बढ़ने का सपना देखो, उसी को जियो हर चीज तुम्हें प्राप्त होगी।
प्रभु की इच्छा सर्वोपरि:
प्रभु की इच्छा सर्वोपरि है जब हम कोई कार्य करते हैं तो उसमें “मैं” कर रहा हूँ की भावना रहती है यह मैं अभिमान को दर्शाता है जहां मैं होता है वहाँ हार हो जाती है भगवदिच्छा को मानते हुए संपन्न किए गए कार्य में यदि हार होगी तो भी भगवान की इच्छा और जीत होगी तो भी भगवान की इच्छा है इस भावना में हार नहीं हो सकती क्योंकि अब प्रेरक भगवान हैं।
इसी प्रकार जीवन में कर्म करते समय यदि हम अभिमान रखें कि मैं कर रहा हूँ तो उसका फल भी हमें भोगना पड़ता है और जब भगवान को प्रेरक मानकर कर्म करते हैं तो हार जीत से कोई अंतर नहीं पड़ता क्योंकि उसमें प्रभु इच्छा सर्वोपरि है।







