ओम माथुर
मौसम और इंसान कब बदल जाए कोई भरोसा नहीं। आजकल राजनीति में लोग नई दुनिया बसा लेते हैं। एक चेहरे पर कई चेहरे लगा लेते हैं। पर, प्रो. सांवरलाल जाट ऐसे नहीं थे, वो मरते दम तक मेरे साथ थे। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजस्थान में भाजपा की दिग्गज नेता वसुंधरा राजे का ये बयान आज की राजनीति पर बिल्कुल खरा उतरता है। लेकिन सत्ता के लोभ में अगर राजनीतिज्ञ नई दुनिया नहीं बसाएंगे, चेहरे पर चेहरा नहीं लगाएंगे, तो क्या हाशिए पर नहीं चले जाएंगे?
रविवार को अजमेर जिले के सिरोंज में पूर्व मंत्री स्वर्गीय सांवरलाल जाट की प्रतिमा के अनावरण के बाद वसुंधरा के एक्स पर किए गए इस पोस्ट ने ये सवाल खड़ा कर दिया कि क्या वसुंधरा के सर्मथक विधायक और नेता उनसे छिटक रहे हैं? क्या राजस्थान में भजनलाल शर्मा सरकार जमने के बाद से वसुंधरा समर्थक उनसे किनारा करने लगे हैं? अगर ऐसा है,तो इसमें गलत क्या है? राजनीति में कोई भजन-कीर्तन करने नहीं आता। हर नेता उसी का दामन थामता है, जिसकी चवन्नी चलती है। सरकार बनने के डेढ़ साल बाद भी जब वसुन्धरा के हाथ ही कुछ नहीं लगा है, तो उनके सर्मथक क्या उम्मीद करें? जब तक राजे का राज रहा, भाजपा नेता उनके पीछे रहे। करीब दो दशक वो राज्य में भाजपा की निर्विवाद और अव्वल नेता रही। लेकिन राजस्थान की सीएम रहते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से विवाद उन्हें भारी पड़ गया। तब से अब तक राज्य में राजे हाशिए पर ही है।
वसुंधरा राजे ने ट्वीट कर कहा : मौसम और इंसान कब बदल जाए कोई भरोसा नहीं
मौसम और इंसान कब बदल जाए कोई भरोसा नहीं। आजकल राजनीति में लोग नई दुनिया बसा लेते हैं, एक चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते हैं, पर प्रो.सांवर लाल जाट ऐसे नहीं थे। वे मरते दम तक मेरे साथ थे।
आज अजमेर जिले के सिरोंज गांव में पूर्व मंत्री स्व. प्रो.जाट जी के मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में उपस्थित रही। स्व. श्री भैरों सिंह शेखावत जी, स्व. प्रो.सांवर लाल जाट जी और स्व. डॉ.दिगंबर सिंह जी के चले जाने से बहुत नुकसान हुआ। वे मेरी मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। मेरी तरह स्व. प्रो.जाट भी राजनीति में पूर्व उपराष्ट्रपति स्व.भैरों सिंह शेखावत की स्कूल के छात्र थे। उनकी अजमेर लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं थी, पर अनुशासित होने के कारण लड़े और जीते।
हमने 2018 में जब किसानों का 50 हज़ार तक का कर्जा माफ किया तब स्व. सांवर लाल जाट जी होते तो बहुत ख़ुश होते। अजमेर में बीसलपुर का पानी उन्होंने ही पहुंचाया। उनकी चाह थी कि चम्बल बेसिन का पानी बीसलपुर बांध में डले।
हमने 2018 में ERCP शुरू की, जिससे सांवर जी का सपना पूरा होगा। उनके निधन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा और राष्ट्र के लिए एक बड़ी क्षति बताया था। उनके पुत्र विधायक श्री रामस्वरूप लांबा उनकी सोच को आगे बढ़ा रहें हैं।
विधानसभा चुनाव 2023 पार्टी ने उनके नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ा था। जबकि दबाव बनाने के लिए उन्होंने पार्टी से अलग खुद का जनसंपर्क अभियान चलाया। लेकिन नाकाम रही। उसके बाद जब पार्टी ने चुनाव जीत लिया, तो फिर मुख्यमंत्री बनने के लिए कई विधायकों को अपने घर पर एकत्र कर फिर दबाव बनाया। लेकिन मोदी-शाह की भाजपा जमे-जमाए और भविष्य में उनके लिए चुनौती बन सकने वाले राज्यों के क्षत्रियों को निपटाने में लगी थी। राजे भी इसी निशाने पर थी। इसलिए हालात ऐसे बनाए गए कि दिल्ली से आई भजनलाल शर्मा की पर्ची को भी वसुंधरा को खोलना पड़ा। इसके बाद जब मंत्रिमंडल का गठन हुआ तो वसुंधरा के कई सर्मथक को जो वरिष्ठता और कई बार जीतने के कारण मंत्री बनने के दावेदार थे ,उन्हें किनारे कर दिया गया। ऐसे उनके कई सर्मथक विधायक उनसे दूरी बनाते हुए संतुलन साधने में लगे हैं, ताकि भविष्य में मंत्रिमंडल विस्तार और अन्य राजनीतिक नियुक्तियों का लड्डू प्रसाद में मिल सके। माना जा रहा है राजे का कल का बयान यही राज खोल रहा था। उन्हें भी पता होगा कि चेहरे पर चेहरे लग रहे है। सत्ता की सुगंध में लोग पाले बदल रहे हैं।
सवाल ये भी है कि नेता और कार्यकर्ता पार्टी के प्रति निष्ठावान और समर्पित होने के बजाय किसी नेता विशेष के लिए क्यों निष्ठावान रहे? क्यों मरते दम तक एक नेता के रहें। बड़े नेताओं की इसी चाहत के कारण पार्टियों में गुटबाजी है। आपसी कलह है। एक-दूसरे को निपटाने की साजिशें हैं। कांग्रेस में ये सब खुलेआम होता है,तो भाजपा में परदे के पीछे। लेकिन भाजपा में मोदी और संघ का डर इसे उभरने से रोकता है। तो कांग्रेस में खुद गुटों के नेता ही इस हवन में घी डालते हैं। बहरहाल, वसुंधरा के बयान को उनकी उपेक्षा की पीड़ा और सर्मथकों के छिटकने के दर्द से जोड़ा जा रहा है।


आज अजमेर जिले के सिरोंज गांव में पूर्व मंत्री स्व. प्रो.जाट जी के मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में उपस्थित रही। स्व. श्री भैरों सिंह शेखावत जी, स्व. प्रो.सांवर लाल जाट जी और स्व. डॉ.दिगंबर सिंह जी के चले जाने से बहुत नुकसान हुआ। वे मेरी मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। मेरी तरह स्व. प्रो.जाट भी राजनीति में पूर्व उपराष्ट्रपति स्व.भैरों सिंह शेखावत की स्कूल के छात्र थे। उनकी अजमेर लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं थी, पर अनुशासित होने के कारण लड़े और जीते।




