लखनऊ, 12 जुलाई: अखिल भारतीय साहित्य परिषद महानगर लखनऊ ने सृजनविहार गोमतीनगर में गुरु पूर्णिमा समारोह आयोजित किया। मुख्य वक्ता श्रीधर पराड़कर ने कहा कि साहित्यकार का लेखन पाठक तक पहुंचकर प्रभाव डालना चाहिए। गुरु शब्द ब्रह्म की तरह पवित्र है और इसका प्रयोग सोच-समझकर करना चाहिए। उन्होंने साहित्यकारों से शब्द साधना पर ध्यान देने और विद्या को जीभ पर नर्तन करने वाला बनाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डा. ममता पंकज की वाणी वंदना और राजीव वत्सल के परिषद गीत से हुआ। पवन पुत्र बादल, विजय त्रिपाठी और निर्भय नारायण गुप्त ने गुरु महिमा का बखान किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील चन्द्र त्रिवेदी मधुपेश ने कहा कि स्वयं को गुरु मानकर लिखना चाहिए।
समारोह में राजवीर रतन को मीडिया प्रमुख नियुक्त किया गया। श्रीधर पराड़कर के उपन्यास तत्वमसि के अंशों का पाठ और पुस्तक घुमंतुओं की लेखनी पर चर्चा हुई। हरिनाथ शिदे, संजीव श्रीवास्तव, मनमोहन बाराकोटी, कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड, रविन्द्रनाथ तिवारी, विजय प्रसाद, डा. बलजीत कुमार श्रीवास्तव, ज्योति किरन रतन आदि उपस्थित रहे।







