केरल के शिक्षक अब्दुल मलिक: नदी तैरकर बच्चों को पढ़ाने की 20 साल की प्रेरक यात्रा
नई दिल्ली, 14 जुलाई : शिक्षा का महत्व एक सच्चे शिक्षक से बेहतर भला कौन समझ सकता है? केरल के मलप्पुरम जिले के शिक्षक अब्दुल मलिक इसकी जीवंत मिसाल हैं। पिछले 20 सालों से वे हर दिन कडालुंडी नदी को रबड़ टायर के सहारे तैरकर पार करते हैं, ताकि अपने स्कूल में बच्चों को गणित पढ़ा सकें। उनका स्कूल तीन तरफ से पानी से घिरा है, और वहां पहुंचने का कोई आसान रास्ता नहीं है। फिर भी, अब्दुल ने कभी हार नहीं मानी। वे अपने कपड़े, किताबें और जरूरी सामान एक प्लास्टिक बैग में रखकर सिर पर बांधते हैं, नदी पार करते हैं, और सूखे कपड़े पहनकर स्कूल पहुंचते हैं।

20 साल के इस सफर में अब्दुल ने न केवल समय पर स्कूल पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया, बल्कि एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली। उनकी यह लगन और समर्पण बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। अब्दुल न सिर्फ गणित पढ़ाते हैं, बल्कि अपने छात्रों को पर्यावरण संरक्षण और तैराकी जैसे जीवन कौशल भी सिखाते हैं। वे कडालुंडी नदी की सफाई के लिए अभियान चलाते हैं और बच्चों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाते हैं।
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लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय कहते हैं –
“अब्दुल मलिक जैसे शिक्षक न केवल बच्चों को शिक्षित करते हैं, बल्कि अपनी निष्ठा और मेहनत से समाज को प्रेरित करते हैं।”
उनकी कहानी बच्चों को यह सिखाती है कि कठिनाइयों के बावजूद, अगर जुनून और मेहनत हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
बच्चों, अब्दुल मलिक की यह कहानी हमें बताती है कि शिक्षा के रास्ते में आने वाली हर बाधा को पार किया जा सकता है। उनकी तरह मेहनत और लगन से अपने सपनों को पूरा करो और दूसरों के लिए प्रेरणा बनो।
एक यूजर Fahim Akhtar ने लिखा: हर रोज़ 1 किलोमीटर तैरकर स्कूल पहुंचे, 20 साल तक! केरल के गणित शिक्षक अब्दुल मलिक ने 3 घंटे की बस यात्रा से बचने के लिए रोज़ मीनाचिल नदी तैरकर पार की — 20 साल तक बिना एक भी क्लास छोड़े। प्लास्टिक बैग में कपड़े, कमर में ट्यूब और दिल में शिक्षा के लिए जुनून। बारिश हो, तेज़ बहाव या सांप , कुछ नहीं रोक सका। आज वो स्कूल के प्रिंसिपल हैं, बच्चों को तैरना सिखाते हैं और नदी को स्वच्छ रखने की मुहिम चलाते हैं। ये है उनकी सच्ची लगन और समर्पण की मिसाल।







