बलूच संघर्ष निर्णायक मोड़ पर: दावा- बलूचिस्तान के कई जिले अब पाकिस्तानी नियंत्रण से बाहर, ‘फ्री बलूचिस्तान’ के नारे गूंजे
नई दिल्ली, 18 जुलाई : पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्वतंत्रता संग्राम ने एक ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों और बलूच कार्यकर्ताओं के दावों के अनुसार, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के बढ़ते दबाव के सामने 500 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों ने लड़ाई से इंकार कर दिया है। इन सैनिकों को कथित तौर पर बसों में भरकर वापस पंजाब भेज दिया गया है। यह घटना बलूचिस्तान के स्वतंत्रता आंदोलन को और मजबूती दे रही है, जिसे अब “निर्णायक मोड़” के रूप में देखा जा रहा है।
दावों की हकीकत पर क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर (@BaluchFighter) ने 17 जुलाई 2025 को पोस्ट किया, जिसमें दावा किया गया कि बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया है। पोस्ट में कहा गया, “बलूचिस्तान की ऐतिहासिक जीत! 500 से अधिक पाकिस्तानी जवानों ने लड़ने से इंकार कर दिया। बसों में भरकर सैनिकों को पंजाब वापस भेजा गया। बलूच संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर है।” इस पोस्ट के साथ एक वीडियो भी साझा किया गया, जिसमें कथित तौर पर बलूच विद्रोहियों की कार्रवाइयों को दिखाया गया है। एक अन्य यूजर ने लिखा, “बलूचिस्तान ने पाकिस्तान को मार-मारकर बैंड बजा दी। बहुत जल्द बलूचों को आजादी मिलने वाली है।”
https://x.com/i/status/1945840165580345847
बलूचिस्तान में बढ़ता विद्रोह
बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रांत, लंबे समय से स्वतंत्रता की मांग को लेकर चर्चा में है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) जैसे संगठन दशकों से पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष चला रहे हैं। इनका आरोप है कि पाकिस्तान सरकार प्रांत के संसाधनों का शोषण कर रही है, जबकि स्थानीय बलूच आबादी को गरीबी और हाशिए पर जीवन जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हाल के महीनों में BLA ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं, जिनमें सैन्य चौकियों, सरकारी इमारतों और चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर हमले शामिल हैं।
क्या है ‘ऑपरेशन बाम’
7 जुलाई 2025 को बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने “ऑपरेशन बाम” (Operation Baam) शुरू किया, जिसमें पंजगुर, सुरब, केच और खारान जैसे जिलों में सैन्य और सरकारी ठिकानों पर 17 हमले किए गए। इन हमलों में संचार लाइनों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया। BLF ने दावा किया कि यह ऑपरेशन उनकी सशस्त्र प्रतिरोध की नई रणनीति का हिस्सा है। इसके अलावा, BLA ने मई 2025 में “ऑपरेशन हीरोफ 2.0” के तहत 51 से अधिक स्थानों पर 71 समन्वित हमले किए, जिनमें सैन्य काफिलों, खुफिया केंद्रों और खनिज परिवहन वाहनों को निशाना बनाया गया।
पाकिस्तानी सैनिकों का मनोबल टूटा?
सोशल मीडिया पर किए गए दावों के अनुसार, बलूच विद्रोहियों के लगातार हमलों और बढ़ते दबाव से पाकिस्तानी सेना का मनोबल टूट रहा है। 500 से अधिक सैनिकों के लड़ाई से इंकार करने की खबर, यदि सत्य है, तो यह बलूच आंदोलन की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक हो सकती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। पाकिस्तानी सेना ने इन हमलों के जवाब में कई क्षेत्रों में तलाशी अभियान शुरू किए हैं, लेकिन सूचना ब्लैकआउट और इंटरनेट बंद होने के कारण सटीक जानकारी प्राप्त करना मुश्किल है।
सोशल मीडिया मंच पर उत्साह और समर्थन
बलूचिस्तान की आजादी के समर्थन में सोशल मीडिया पर “रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान” ट्रेंड कर रहा है। कई यूजर्स ने बलूच विद्रोहियों की कार्रवाइयों की सराहना की है और इसे पाकिस्तान के लिए एक बड़े संकट के रूप में देखा जा रहा है। कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया है कि बलूचिस्तान के कई जिले अब पाकिस्तानी नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं। बलूच लेखक मीर यार बलोच ने X पर लिखा, “हमने अपनी आजादी की घोषणा कर दी है। हम भारत से नई दिल्ली में बलूच दूतावास खोलने और संयुक्त राष्ट्र से शांति सेना भेजने की मांग करते हैं।”
बलूच विद्रोहियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी: पाकिस्तान
पाकिस्तानी सेना और सरकार ने इन हमलों को भारत समर्थित आतंकवाद करार दिया है, हालांकि इसके लिए कोई ठोस सबूत नहीं दिए गए हैं। सेना के प्रवक्ता ने कहा कि बलूच विद्रोहियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, बलूच नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका आंदोलन स्वदेशी है और यह उनकी जमीन और संसाधनों की रक्षा के लिए है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विश्लेषकों का मानना है कि बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा और विद्रोहियों की रणनीतिक सफलताएं पाकिस्तान के लिए एक गंभीर चुनौती बन रही हैं। प्रांत की रणनीतिक स्थिति, खासकर CPEC प्रोजेक्ट्स और ग्वादर बंदरगाह के कारण, इसे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व देती है। बलूच नेताओं का भारत और संयुक्त राष्ट्र से समर्थन की मांग करना इस संघर्ष को वैश्विक मंच पर ले जाने की कोशिश है।
बलूच नेताओं का दावा : आंदोलन अब ‘आखिरी चरण’ में
बलूचिस्तान का संघर्ष अब केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहा। यह क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है, खासकर तब जब बलूच विद्रोही परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की चेतावनी दे रहे हैं। बलूच नेताओं का दावा है कि उनका आंदोलन अब “आखिरी चरण” में है, और “ऑपरेशन बाम” जैसे अभियान इसकी ताकत दिखा रहे हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तानी सरकार के लिए इस संकट से निपटना एक बड़ी चुनौती है, खासकर जब देश पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।
बलूचिस्तान में चल रहा स्वतंत्रता संग्राम न केवल पाकिस्तान, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। सोशल मीडिया पर बलूचों के समर्थन में उमड़ रहा जनसैलाब और सैनिकों के कथित तौर पर पीछे हटने की खबरें इस संघर्ष की गंभीरता को दर्शाती हैं। फिलहाल, “फ्री बलूचिस्तान” के नारे न केवल प्रांत की सड़कों पर, बल्कि वैश्विक मंचों पर भी गूंज रहे हैं।






