मांग : निजीकरण का प्रस्ताव असंवैधानिक आयोग करें खारिज
लखनऊ, 21 जुलाई 2025: मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की बिजली दर बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद ने तीखा हमला बोला। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि 33,122 करोड़ रुपये के सरप्लस के बावजूद बिजली दरों में 45% बढ़ोतरी का प्रस्ताव असंवैधानिक और टैरिफ नीति के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि दरों में 45% कमी हो या अगले 5 साल तक प्रतिवर्ष 9% की कटौती की जाए।
असंवैधानिक है निजीकरण :
परिषद ने निजीकरण के प्रस्ताव को असंवैधानिक बताते हुए इसे खारिज करने की मांग की। वर्मा ने चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार में शामिल नौकरशाहों पर सीएजी के बाद सीबीआई की जांच होगी और दोषियों को जेल जाना पड़ सकता है।बिजली चोरी की गंभीर समस्या: परिषद ने बताया कि मध्यांचल में हर माह 106 करोड़ रुपये की बिजली चोरी हो रही है, जो सालाना 1,280 करोड़ रुपये तक पहुंचती है। पूरे प्रदेश में यह आंकड़ा 5,000 करोड़ रुपये है। इस पर अंकुश लगाने की जरूरत पर जोर दिया गया।
स्मार्ट मीटर या ठग मीटर?:
स्मार्ट प्रीपेड मीटर की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए परिषद ने इसे “ठग मीटर” करार दिया। मीटरों में रीडिंग और लोड जंपिंग की शिकायतों के बाद गुपचुप सॉफ्टवेयर बदला गया। परिषद ने उच्च गुणवत्ता वाले मीटर और 5% छूट की मांग की।
ट्रांसफार्मर और शिकायतों का मामला :
मध्यांचल में हर साल 66,507 से 70,044 वितरण ट्रांसफार्मर जल रहे हैं। 2024-25 में 10.59 लाख शिकायतें दर्ज हुईं, जिनका समय पर निस्तारण नहीं हुआ। परिषद ने मुआवजा कानून लागू करने और ओटीपी व्यवस्था शुरू करने की मांग की।
बिल्डरों के उत्पीड़न पर कार्रवाई की मांग:
परिषद ने बिल्डरों द्वारा उपभोक्ताओं के शोषण पर कठोर कदम उठाने और छोटे दुकानदारों के लिए 1 किलोवाट तक घरेलू दर पर नई टैरिफ श्रेणी बनाने की मांग की।
आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की मौजूदगी में मध्यांचल की प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल और पावर कॉरपोरेशन के डीसी वर्मा ने प्रस्तुतीकरण दिया। सभी उपभोक्ताओं ने दर बढ़ोतरी का विरोध किया।







