लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में प्रशासन के हालिया फैसलों ने कर्मचारियों और छात्रों में भारी असंतोष पैदा कर दिया है। 12 और 18 अगस्त को जारी आदेशों में कई कर्मचारियों का स्थानांतरण किया गया और उनके पद समाप्त कर दिए गए, जिसे कर्मचारी कुलपति और रजिस्ट्रार की मनमानी बता रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह रजिस्ट्रार और कुलपति की मनमानी का नतीजा है। उनका आरोप है कि कुलपति की सहमति से रजिस्ट्रार ने यह निर्णय लिया और लगातार दोनों अधिकारी मिलकर कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई कर रहे हैं। सबसे ज्यादा नुकसान आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को हुआ है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में सुनियोजित तरीके से स्थायी और अस्थायी पोस्ट को खत्म किया जा रहा है। इससे न केवल कर्मचारियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है, बल्कि नौकरी की असुरक्षा भी बढ़ गई है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे बीते 15 से 20 वर्षों से लगातार विवि में सेवा दे रहे हैं, इसके बावजूद अचानक उनके पद समाप्त कर दिए गए। यह फैसला न सिर्फ अन्यायपूर्ण है बल्कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है।
छात्रों और कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे ही आदेश जारी होते रहे तो विश्वविद्यालय का कामकाज ठप हो सकता है। उनका कहना है कि अचानक ट्रांसफर और पद समाप्ति से प्रशासनिक अव्यवस्था और बढ़ेगी।
सूत्रों के मुताबिक यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में रजिस्ट्रार की ओर से दो दर्जन से अधिक पद खत्म करने की तैयारी है। यही कारण है कि कर्मचारियों और छात्रों का गुस्सा सीधे कुलपति और रजिस्ट्रार पर फूट रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय में पहले से ही स्टाफ की कमी है, इसके बावजूद पद खत्म करना समझ से परे है। उनका आरोप है कि विवि प्रशासन जानबूझकर कार्यप्रणाली को कमजोर कर रहा है और इसका सीधा असर छात्रों व कर्मियों पर पड़ रहा है।
रजिस्ट्रार का बयान: डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, रजिस्ट्रार, बीबीएयू ने कहा, “विश्वविद्यालय में ट्रांसफर या पोस्टिंग का कोई विवाद नहीं है। पदों को जरूरत के आधार पर सृजित या समाप्त किया जाता है।”







