नयी दिल्ली 25 अक्टूबर : पांच साल से लंबित वेतनमान पुनरीक्षण की मांग को लेकर मंगलवार और बुधवार को आईडीबीआई बैंक कर्मियों की रही हड़ताल के कारण बैंक का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ और करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हुई।
आईडीबीआई बैंक अधिकारी संघ के महासचिव विळल कोटेश्वर राव ने बताया कि बैंक प्रबंधन के अड़यिल रवैये के कारण आईडीबीआई बैंक कर्मियों का वेतनमान पुनरीक्षण पांच साल से लंबित है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन नवंबर 2012 से 12.5 प्रतिशत प्रोविजनिंग अरेंजमेंट के अनुरूप भी वेतनमान पुनरीक्षण करने को राजी नहीं है।
श्री राव ने कहा कि दो दिवसीय हड़ताल सफल रही। इस दौरान कामकाज के प्रभावित होने से बैंक और सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हुई। उन्होंने इस दौरान ग्राहकों को हुई असुविधा के लिए खेद भी व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में प्रत्येक पांच वर्ष पर वेतनमान पुनरीक्षण होता रहा है, लेकिन आईडीबीआई बैंक अधिकारी-कर्मचारी 10 साल से एक ही वेतनमान पर काम करने को मजबूर हैं।
अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव सी.एच. वेंकटचलम ने आईडीबीआई बैंक कर्मियों की मांगों को अपना समर्थन देते हुए कहा है कि यदि उनकी जायज मांगें शीघ्र नहीं मानी गयीं तो पूरी सभी बैंकों में हड़ताल की जायेगी। वह आज मुम्बई में आईडीबीआई बैंक कर्मियों के आंदोलन में भी शामिल हुए।
श्री वेंकटचलम ने कहा कि यदि आईडीबीआई बैंक प्रबंधन का अड़यिल रवैया जारी रहा तो सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और विदेशी बैंकों में एक साथ हड़ताल की जायेगी।
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