रेलकर्मियों और रंगकर्मियों ने सफदर हाशमी को किया नमन
लखनऊ। आज ही के दिन 1989 में नुक्कड़ नाटक ‘हल्ला बोल’ के दौरान हमला झेलकर शहीद हुए मशहूर नाटककार, गीतकार और जन-संस्कृतिकर्मी सफदर हाशमी और उनके साथ शहीद हुए नेपाली मजदूर रामबहादुर को याद करने के लिए एक अनोखा मेला सजा।
आलमबाग के सवारी माल डिब्बा कारखाना में अमुक आर्टिस्ट ग्रुप और उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन ने संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम में रेलकर्मियों और रंगकर्मियों ने एक साथ आकर दोनों विभूतियों को श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम की शुरुआत दोनों के चित्रों पर माल्यार्पण से हुई। उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन के शाखा मंत्री अरविंद सिंह, अध्यक्ष दिनेश यादव, उपाध्यक्ष अभिनीत कुमार जैन और अमुक ग्रुप के मुखिया अनिल मिश्र ‘गुरुजी’ ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
फिर माहौल बना जनगीतों का – देशभक्ति और संघर्ष के सुरों ने पूरा कारखाना गुंजा दिया। चरमोत्कर्ष रहा अनिल मिश्र गुरुजी के लेखन-निर्देशन में मंचित नुक्कड़ नाटक “हम क्रांति करेंगे” का प्रभावशाली मंचन। शशांक पांडेय, अनामिका सिंह, शोभित राजपूत, राहुल प्रताप सिंह और ज्योति ने दिल छू लेने वाला अभिनय कर दर्शकों में जोश भर दिया।
अरविंद सिंह ने कहा, “सफदर हाशमी और रामबहादुर की शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता। हम रेलवे कर्मियों को पुरानी पेंशन स्कीम दिलाने के लिए संघर्षरत हैं – यह लड़ाई उनके विचारों से प्रेरित है और जारी रहेगी।”
अभिनीत कुमार जैन ने जोड़ा और कहा “आज के दौर में सफदर और रामबहादुर जैसी हस्तियों की सबसे ज्यादा जरूरत है।”
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार राजवीर रतन, नाट्य निर्देशक धरमश्री सिंह, जादूगर सुरेश, चित्रकार विनोद विश्वकर्मा सहित दर्जनों रंगकर्मी और रेलकर्मी मौजूद रहे।एक तरफ रेलवे की मशीनों की आवाज, दूसरी तरफ क्रांति के नारे सफदर का संदेश आज भी जिंदा है: नुक्कड़ पर, कारखाने में, सड़क पर… आवाज उठानी है!







