बजरंग दल के सामने बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार का साथ देने वाले दीपक कुमार ने ठुकराई व्यक्तिगत सम्मान राशि – चंद्रशेखर आजाद ने बढ़ाया हौसला, कहा “किसी भी मदद के लिए संपर्क करें”
कोटद्वार (उत्तराखंड): इंसानियत की मिसाल पेश करने वाले दीपक कुमार (जिन्हें अब ‘मोहम्मद दीपक’ कहा जा रहा है) ने एक बार फिर दिल जीत लिया! कोटद्वार में 26 जनवरी को एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार (वकील अहमद) की दुकान के नाम (‘बाबा स्कूल ड्रेस’) पर बजरंग दल कार्यकर्ताओं के विरोध के दौरान दीपक ने बहादुरी से उनका पक्ष लिया और खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताकर भीड़ को रोका।
इस घटना के बाद दीपक को धमकियां मिलीं, FIR हुई, लेकिन उनका हौसला कम नहीं हुआ। अब जब उन्हें सम्मान राशि (झारखंड सरकार के मंत्री इरफान अंसारी द्वारा 2 लाख रुपये सहित सम्मान का ऐलान) मिलने की बात हुई, तो दीपक ने बड़ा बयान दिया: उन्होंने कहा कि
“जो सम्मान राशि मुझे दी जाने की बात हुई है, वो मैं बहन अंकिता भंडारी और अन्य वो बहनें, जो आज भी न्याय के लिए ठोकरें खा रही हैं, उनकी मदद के लिए दूंगा।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब कोटद्वार विवाद में अंकिता भंडारी केस (2022 में रिसॉर्ट मालिक द्वारा हत्या का मामला) का जिक्र बार-बार हो रहा है। दीपक ने साफ कहा कि वो व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि उन पीड़ित बहनों के लिए लड़ना चाहते हैं जिन्हें न्याय नहीं मिला।

इस बीच, नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने दीपक से बात की। सांसद ने उनके हौसले की तारीफ की और कहा, “किसी भी प्रकार की सहायता या आवश्यकता हो तो मुझसे संपर्क करें।” यह बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जहां लोग दीपक को ‘असली शेर’ कह रहे हैं।
घटना की शुरुआत एक दुकान के नाम से हुई, लेकिन दीपक ने इसे इंसानियत, सद्भाव और न्याय की लड़ाई में बदल दिया। पूरे देश में उनकी तारीफ हो रही है – राहुल गांधी से लेकर मुस्लिम संगठनों तक सब उनका साथ दे रहे हैं।
दीपक कुमार की ये कहानी साबित करती है कि असली बहादुरी नाम या धर्म में नहीं, बल्कि इंसानियत में होती है। क्या आप भी मानते हैं कि ऐसे लोगों को सम्मान मिलना चाहिए? कमेंट में बताएं!







