20% छूट, रंगोली में किताबों का जादू, वंदे मातरम् पर 15 फीट कैनवस, प्रेम एक नदी से और भाव सुमन की सुगंध का धमाकेदार विमोचन!
लखनऊ, 15 मार्च: रवीन्द्रालय चारबाग में लखनऊ पुस्तक मेला रविवार को परिवारों की पिकनिक बन गया! सुबह से रात 9 बजे तक फ्री एंट्री वाले इस मेले में किताबों की दुनिया में खो गए लोग, प्राचीन आयुर्वेद से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक सब कुछ मिला।
हकीम लुकमान के चमत्कार से विश्वगुरु तक
शर्मा बुक प्रयागराज स्टॉल पर हकीम लुकमान के चमत्कारी नुस्खे, धन्वंतरि निधण्टु, भारतीय जड़ी-बूटियां और चिकित्सा सागर ने सबको लुभाया। दिव्यांश पब्लिकेशन पर साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार विजेता नीलोत्पल मृणाल की विश्वगुरु, दिव्य प्रकाश दुबे की पेंशन मत ले यार और दोस्तोयेवस्की का हिंदी अनुवाद व्हाइट नाइट्स हिट रही। हर किताब पर सीधे 20% डिस्काउंट – खरीदारी का मौका हाथ से न जाने दें!
रंगों से जी उठा वंदे मातरम्
सुबह युवा चित्रकारों ने भूपेन्द्र अस्थाना के संयोजन में 15 फीट के कैनवस पर पीला-केसरिया-भूरा रंग भरकर वंदे मातरम् के 150 साल मनाए। नवअंशिका फाउंडेशन की महिला माह रंगोली प्रतियोगिता में विजयलक्ष्मी गुप्ता, स्मिता पांडेय जैसी महिलाओं ने किताबों से सजी आकर्षक रंगोलियां बनाईं।
प्रेम की नदी बही, भाव सुमन महके
संजय कुमार मालवीय का कहानी संग्रह प्रेम एक नदी से का विमोचन प्रमोदकांत मिश्र और सुधाकर अदीब ने किया जोकि प्रेम, प्रायश्चित, गिरगिट जैसी कहानियां दिल छू गईं। वहीं, डा. अमिता दुबे की 63वीं पुस्तक भाव सुमन की सुगंध (स्व. डा. शंभूनाथ पर) का भावुक लोकार्पण हुआ। स्वर्णरश्मि की सूफी इश्क कविताओं पर भी गर्मागर्म चर्चा।
युवा रचनाकार दिवस की धूम
शाम को युवा रचनाकार मंच के 46वें दिवस पर सुल्तानपुर के आदर्श पाण्डेय सम्मानित हुए। डा. रश्मि शील की अध्यक्षता में रचनाकारों ने कविताएं-कहानियां सुनाईं।
अवधी व्यंजनों पर यूनेस्को की ‘स्वाद का शहर’ वाली बातें, मूल रचना से रूपांतरण पर गहन चर्चा ही नहीं बल्कि मेला सिर्फ किताबों का नहीं, संस्कृति और विचारों का उत्सव बन गया!







