पारंपरिक परीक्षाओं से आगे: अब हर छात्र के ब्रेन पैटर्न के आधार पर बनेगा पर्सनलाइज्ड अकादमिक रोडमैप – लर्निंग गैप्स को जड़ से खत्म करने का वादा
नई दिल्ली : अमेरिका की Student Education Diagnostics (SED) ने भारत में क्रांतिकारी नेचुरल इंटेलिजेंस और न्यूरोसाइंस-आधारित लर्निंग डायग्नोस्टिक्स प्लेटफॉर्म लॉन्च कर दिया है।
यह प्लेटफॉर्म अब सिर्फ़ अंकों से नहीं, बल्कि दिमाग कैसे सीखता है जो उसके आधार पर छात्रों का पूरा विश्लेषण करता है। ब्रेन-बेस्ड असेसमेंट्स से यह पता लगाता है कि हर बच्चा जानकारी को कैसे प्रोसेस करता है, उसकी असली ताकतें क्या हैं और कहाँ सुधार की ज़रूरत है।
फिर व्यक्तिगत अकादमिक रोडमैप बनाता है जिससे क्लास में कमज़ोर दिखने वाले बच्चे भी अपनी सही क्षमता के साथ आगे बढ़ सकें। शिक्षक और माता-पिता को शुरुआत में ही लर्निंग गैप्स पकड़ने और उन्हें भरने में मदद मिलती है।
SED के संस्थापक श्रीनेश वी ने कहा कि “पारंपरिक परीक्षाएँ सिर्फ़ रिज़ल्ट दिखाती हैं, लेकिन यह नहीं बतातीं कि बच्चा कैसे सीखता है। SED इसी कमी को दूर करने आया है न्यूरोसाइंस की ताकत से।”
लॉन्च SED लर्निंग इंटेलिजेंस समिट के दौरान हुआ, जिसमें अमेरिकी और भारतीय शिक्षा विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कंपनी की CEO ऐशली सांबालुक ने कहा कि भारत की विशाल छात्र आबादी के लिए यह बदलाव लाने वाला कदम है प्रदर्शन से आगे बढ़कर क्षमता-आधारित शिक्षा की ओर।
प्लेटफॉर्म में SAT/ACT फ्रेमवर्क, US सर्टिफिकेशन पाथवे, 360° प्रोग्रेस ट्रैकिंग और शुरुआती गैप्स की पहचान जैसी सुविधाएँ हैं।
भारत में कई स्कूल चेन और शिक्षा संगठनों ने पहले ही रुचि दिखाई है। SED अब अमेरिका, वियतनाम, जॉर्जिया के बाद भारत में अपना विस्तार तेज़ कर रहा है।शिक्षा में दिमाग को समझने वाली यह नई तकनीक बच्चों के भविष्य को वाकई बदल सकती है!







