गरीब-मध्यम वर्ग के लिए प्रेरणा, बच्चों से लेकर बड़ों तक को भावुक किया
लखनऊ : समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दो दिन पहले विश्व साइकिल दिवस पर एक खूबसूरत पोस्ट साझा की है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
उन्होंने मुलायम सिंह यादव के गुरु और प्रसिद्ध कवि श्री उदय प्रताप सिंह की रचना साझा की। कविता में साइकिल को सस्ती, आरामदायक और जीवन की साथी बताया गया है।
उदय प्रताप सिंह की कविता की कुछ पंक्तियाँ:
साइकिल भी है खूब सवारी
थोड़े दाम काम दे भारी
बच्चों का है खेल साइकिल
कभी न मांगे तेल साइकिल…
अखिलेश यादव की इस पोस्ट को गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों ने खूब पसंद किया। कई लोगों ने कमेंट करके बताया कि साइकिल उनके बचपन की सबसे प्यारी याद है – स्कूल जाना, दोस्तों के साथ घूमना और मेहनत की मिसाल।
यह पोस्ट न सिर्फ साइकिल के महत्व को याद दिलाती है, बल्कि सादगी, मेहनत और संतुलन की सीख भी देती है। अखिलेश यादव की इस पहल को लोगों ने नई पीढ़ी के लिए अच्छी प्रेरणा बताया है।
बता दें कि साइकिल समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह भी है, जिसे अखिलेश अक्सर जन-जीवन से जोड़कर पेश करते हैं।
यहाँ पेश है पूरी कविता :
साइकिल भी है खूब सवारी
थोड़े दाम काम दे भारी
इसकी महिमा जग से न्यारी
सभी जनों को दिल से प्यारी
इसको खर्च न पानी चहिए
पैर चलाओ चलते पहिए
मगर संतुलन साधे रहिए
दोनों हत्थे संभल के गहिए
तो निश्चित है जीत तुम्हारी
साइकिल भी है खूब सवारी
थोड़े दाम काम दे भारी
इसकी जग में महिमा न्यारी
सभी जनों को दिल से प्यारी
साथी श्रमिक किसानों की है
फौजी वीर जवानों की है
दानों और नादानों की है
मेज़बान ,मेहमानों की है
इस पर मोहित सब नर नारी
थोड़े दाम काम दे भारी
जिन पर कोई चले न गाड़ी
उन रास्तों पर चले अगाड़ी
जोर लगाओ चढ़ो पहाड़ी
कभी न देखे जंगल झाड़ी
सबकी दूर करे लाचारी
साइकिल भी है खूब सवारी
बच्चों का है खेल साइकिल
कभी न मांगे तेल साइकिल
चलती रेलम पेल साइकिल
रखती जग से मेल साइकिल
इसका मालिक रहे सुखारी
साइकिल भी है खूब सवारी
थोड़े दाम काम दे भारी
– श्री उदय प्रताप सिंह जी







