आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से मुक्त कराई गई 47 लड़कियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें CWUC ने जबरन चिल्ड्रन होम में बंधक बना रखा है
नई दिल्ली, 13 जनवरी। दिल्ली में आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम पर पापशाला चलाने वाले वीरेंद्र देव दीक्षित की करतूतों का भंडाफोड़ होने के बाद अब मामले में नया मोड़ आया है। इस मामले में पुलिस और बाल कल्याण समिति ही अब आरोपों के घेरे में आ गई है। पाप की पाठशाला चलाने वाले वीरेंद्र दीक्षित के आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से मुक्त कराई गई 47 लड़कियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें सीडब्ल्यूसी ने जबरन चिल्ड्रन होम में बंधक बना रखा है। इन लड़कियों के परिजनों ने उन्हें चिल्ड्रन होम से मुक्त करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की।
परिजनों का कहना है कि उनकी बेटियां वयस्क हैं, इसके बावजूद उन्हें अवैध तरीके से चिल्ड्रन होम में बंधक की तरह रखा गया है। इतना ही नहीं परिजनों ने लड़कियों पर चिल्ड्रन होम में मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का भी आरोप लगाया है। परिजनों ने याचिका में कहा कि उनकी बेटियों की उम्र के वेरिफिकेशन में अज्ञात कारणों से देरी की जा रही है। चिल्ड्रन होम में रखी गई एक १९ वर्षीय लड़की की मां ने अन्य परिजनों की ओर से यह याचिका दायर की है। वकील अमोल खोकने ने यह याचिका दायर की है। परिजनों की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में आज सुनवाई होनी है।
चिल्ड्रन होम में रखी गई लड़कियों ने चीफ जस्टिस से भी इसकी लिखित शिकायत की है कि सीडब्ल्यूसी ने उन्हें जबरन चिल्ड्रन होम में रखा हुआ है। चीफ जस्टिस को भेजी शिकायत में लड़कियों ने लिखा है कि चिल्ड्रन होम में उनसे ऐसे-ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं, जिनसे उनका कोई लेना-देना भी नहीं है। लड़कियों की माने तो जब उन्होंने अपने परिजनों से बात करने की इच्छा जताई तो उनसे कहा गया कि पहले उनकी पहचान वेरीफाई की जाएगी उसके बाद ही बात करने की इजाजत मिलेगी।
उनका कहना है कि जब उन्हें यहां लाया गया तो उनसे कहा गया था कि उन्हें सिर्फ एक दिन वहां रखा जाएगा, लेकिन बीते 13 दिन से उन्हें वहां बंधक बनाकर रखा है। इतना ही नहीं लड़कियों का आरोप है कि उन्हें न तो उनका सामान दिया जा रहा है और न ही उन्हें उनकी दवा दी जा रही है। लड़कियों ने चिल्ड्रन होम में गंदी चादरों, पानी, नहाने और कपड़े धोने वाले साबुन की कमी को लेकर भी शिकायत की है। गौरतलब है कि कुछ परिजनों द्वारा अपनी बेटियों के आध्यात्मिक विश्विद्यालय में बंधक बनाकर रखने और उनका यौन शोषण किए जाने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी दायर करने के बाद दिल्ली पुलिस और दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की टीम ने 19 दिसंबर, 2017 को छापेमारी कर वीरेंद्र दीक्षित के आश्रमों से इन लड़कियों को मुक्त कराया था।






