तकनीक और उम्मीद की नई धड़कन
मुंबई। चिकित्सा क्षेत्र में तकनीक और मानवीय संवेदनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला। एक ओर एआई और रोबोटिक्स के जरिए कार्डियक केयर के भविष्य पर मंथन हुआ, तो दूसरी ओर कैंसर सर्वाइवर्स के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम ने उम्मीद और जागरूकता का संदेश दिया।
एआई और रोबोटिक्स से ‘नेक्स्ट-जेन परफ्यूज़न’ की दिशा
इंडियन सोसाइटी ऑफ एक्स्ट्राकॉर्पोरियल टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित 26वीं वार्षिक नेशनल कॉन्फ्रेंस ‘इसेक्टकॉन 2026’ में विशेषज्ञों ने साफ किया कि भविष्य की हार्ट सर्जरी तकनीक-संचालित और अधिक सुरक्षित होगी। “नेक्स्ट-जेन परफ्यूज़न: एआई, रोबोटिक्स और पर्सनलाइज़्ड केयर” थीम पर केंद्रित इस सम्मेलन में परफ्यूज़निस्ट की भूमिका को खास तौर पर रेखांकित किया गया।
आयोजन से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्लिनिकल निर्णय का विकल्प नहीं, बल्कि सहयोगी तकनीक है। एआई के जरिए सर्जरी के दौरान सटीकता बढ़ेगी, मरीजों की सुरक्षा मजबूत होगी और आपात स्थितियों में बेहतर फैसले लिए जा सकेंगे।
भारत में परफ्यूज़न क्षेत्र में जागरूकता और प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी पर भी चिंता जताई गई। बढ़ती कार्डियक सर्जरी और लाइफ-सपोर्ट जरूरतों को देखते हुए प्रशिक्षण और सरकारी स्तर पर स्पष्ट पहचान की मांग उठी।
“कैंसर फुल स्टॉप नहीं, अल्पविराम है”
इसी कड़ी में नानावटी मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में मशहूर फिल्म निर्माता राजकुमार हिरानी कैंसर सर्वाइवर्स के बीच पहुंचे। कार्यक्रम की थीम थी — “कैंसर इज जस्ट ए कोमा, नॉट ए फुल स्टॉप।”
100 से अधिक सर्वाइवर्स, केयरगिवर्स और डॉक्टरों ने एक मंच पर आकर समय पर जांच, सही इलाज और सकारात्मक सोच के महत्व पर जोर दिया। “सर्वाइवर्स डायरी” सत्र में मरीजों ने अपने संघर्ष और जीत की कहानियां साझा कीं, जिसने माहौल को भावुक और प्रेरणादायक बना दिया।
डॉक्टरों ने बताया कि आधुनिक तकनीकों जैसे रोबोटिक सर्जरी, हाई-प्रिसिजन रेडियोथेरेपी और इम्यून ऑन्कोलॉजी की मदद से कैंसर का सफल इलाज संभव है, बशर्ते समय पर पहचान और उपचार हो।
संदेश साफ: तकनीक और टीमवर्क से बेहतर इलाज
जहां कार्डियक केयर में एआई और रोबोटिक्स भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं, वहीं कैंसर उपचार में जागरूकता और आधुनिक तकनीक उम्मीद की नई किरण बनकर उभर रही है। दोनों आयोजनों ने यह संदेश दिया कि चिकित्सा विज्ञान में प्रगति के साथ-साथ टीमवर्क, प्रशिक्षण और मरीजों का मनोबल भी उतना ही जरूरी है।






