गर्मी हो या ठंड, आजकल लोगों को पानी से ज्यादा डियोड्रेंट से नहाना अच्छा लगता है और इससे उन्हें कॉंफिडेंट भी महसूस होता है। ठंड में नहाने से बचने के लिए और गर्मी में पसीने की बदबू को भगाने के लिए आप डियोड्रेंट से नहा लेते हैं यानि ढेर सारा डियोड्रेंट लगा लेते हैं।
बहुत सी आदतें लोगों के लिए स्टेटस सिंबल बन जाती हैं और उन्हें दूर कर पाना उनके लिए असंभव जैसा हो जाता है. कुछ ऐसी ही आदत है डियोडरेंट का इस्तेमाल करना. गर्मियों में पसीने और बदबू से बचने के लिए डियोडरेंट इस्तेमाल किए जाते हैं लेकिन कुछ लोग इसे हर दिन जरुरी चीज़ की तरह उपयोग में लाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं यह आदत आपके लिए खतरनाक हो सकती है।

हालिया हुए एक शोध ने यह दावा किया है। नॉर्थ कैरोलिना म्यूजियम ऑफ नैचुरल साइंसेज के शोधकर्ताओं के अनुसार, डियोडरेंट में पाए जाने वाले रसायन त्वचा पर पाए जाने वाले बैक्टीरिया की प्रकृति में बदलाव कर देते हैं।
शोधकर्ता होरवाथ ने कहा कि लोगों की त्वचा पर पाए जाने वाले बैक्टीरिया में 62% कोरिन और 21% स्टेफिलोकोकासी प्रजाति के बैक्टीरिया होते हैं। इन दोनों प्रजातियों में कुछ हानिकारक तो कुछ फायदेमंद बैक्टीरिया भी होते हैं।
डियोडरेंट प्रयोग करने वालों के शरीर पर मिलने वाले बैक्टीरिया में 60 % स्टेफिलोकोकासी और 14% कोरिन बैक्टीरिया होते हैं. यही नहीं, इनमें 20% से अधिक अन्य प्रजातियों के बैक्टीरिया मौजूद होते हैं. बैक्टीरिया की प्रकृति में यह बदलाव होना व्यक्ति के लिए खतरनाक हो सकता है।
इसके इस्तेमाल से आपके स्वेद ग्रंथि यानी कि पसीना निकलने वाली ग्रंथि बंद हो जाती है. जिसके कारण शरीर से निकलने वाला टॉक्सिन्स बाहर नही निकल पाता जो कि कैंसर का कारण बन जाता है।
यही नहीं, इसमें न्यूरोटॉक्सिन में अल्युमिनियम यौगिक होते है जिससे आपको अस्थमा, अल्जाइमर की भी शिकायत हो सकती है।
महिलाओं के लिए भी हानिकारक है. इसके डब्बे यानी एल्युमिनियम में पैराबेन नामक यौगिक होता है, जिसके कारण आपको इसके इस्तेमाल से कई परेशानी हो सकती है. इस यौगिक के होने के कारण महिलाओं को कई स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो सकती है, जैसे कि अनियमित पीरियड होना और अपनी उम्र से ज्यादा लगना आदि।







