लंगड़ा भेड़िया का आतंक अभी भी सक्रिय, वन विभाग की तलाश और तेज
बहराइच, 1 अक्टूबर 2025: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में आदमखोर भेड़िए का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। कैसरगंज तहसील के मझारा तौकली गांव के प्यारेपुरवा में सोमवार देर रात एक भयानक हमले में एक वृद्ध दंपति की दर्दनाक मौत हो गई। भेड़ियों के झुंड ने खेत के पास बनी झोपड़ी में सो रहे 70 वर्षीय खेदन और उनकी 65 वर्षीय पत्नी मनकी पर धावा बोल दिया। दोनों के हाथ-पैर, चेहरा और शरीर के ऊपरी हिस्से को बुरी तरह नोच-नोचकर खा लिया गया, जिससे मौके पर ही उनकी सांसें थम गईं।
घटना रात करीब 1-2 बजे की बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, दंपति रोज की तरह फसल की रखवाली के लिए घर से करीब 200 मीटर दूर अहाते में सो रहे थे। हमले की सूचना मिलते ही ग्रामीण दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। शवों को देखते ही इलाके में सनसनी फैल गई।
गुस्से में ग्रामीणों का हंगामा
इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग की लापरवाही पर गुस्सा निकाला। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम को लाठी-डंडों से पीटा गया और एसडीओ राशिद जमील की बोलेरो गाड़ी को तोड़-फोड़ दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि रात 2 बजे हमले की खबर वन विभाग को दे दी गई थी, लेकिन कार्रवाई में देरी हुई। नाराज गावं वालों ने डीएफओ और रेंजर की गाड़ियों पर भी हमला बोल दिया। पुलिस को भारी बल लगाकर स्थिति संभालनी पड़ी।
लगातार हमले, अब तक 6 मौतें
यह हमला 9 सितंबर से शुरू हुए भेड़िए के आतंक का ताजा मामला है। मझारा तौकली और आसपास के 12 गांवों में भेड़िए ने अब तक 6 लोगों की जान ले ली है, जबकि 20 से अधिक घायल हो चुके हैं। सोमवार रात ही उसी इलाके के भिरगूपुरवा में धनपतिया (पत्नी रामदेव) और सेबरी (पत्नी नान्हू) पर हमला हुआ, जहां ग्रामीणों के शोर मचाने से उनकी जान बच गई, लेकिन वे गंभीर रूप से घायल हैं। इससे पहले गंधू झाला गांव की मीना देवी भी शिकार बनीं। तीनों का सीएचसी में इलाज चल रहा है।
लौट आया आदमखोर भेड़िया! 21 दिन..21 अटैक.. दहशत में बहराइच के लोग!
बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 सितंबर को प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वे किया था, जिसमें दो संदिग्ध वन्यजीव दिखे। उन्होंने निर्देश दिए थे कि भेड़िए को पकड़ने में विफलता पर गोली मार दी जाए और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता दी जाए। दो दिन पहले एक नर भेड़िए का शव मिला था, लेकिन हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे। वन विभाग का दावा है कि लंगड़ा भेड़िया अभी भी सक्रिय है, और तलाश तेज कर दी गई है।
फ़िलहाल ग्रामीण दहशत में जी रहे हैं। रातें जागकर पहरा देना पड़ रहा है, और बच्चे-बुजुर्ग घर से बाहर नहीं निकल पा रहे। वन विभाग ने ट्रैप कैमरे लगाए हैं, लेकिन स्थानीयों का कहना है कि अब तेंदुए की भी आशंका है। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम का भरोसा दिलाया है, लेकिन भय का माहौल बरकरार है।







