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    Home»ज़रा हटके

    एलियंस का पृथ्वी पर आना आज भी एक रहस्य!

    By December 2, 2017Updated:December 21, 2017 ज़रा हटके 4 Comments11 Mins Read
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    imaging: shagunnewsindia.com
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    यदि हम केवल अपनी पृथ्वी को ही देखें तो पायेंगे की हमारी पृथ्वी खुद इतनी विशाल है कि आज तक उसके हजारों -लाखों रहस्यों को कोई समझ नहीं सका, तो पृथ्वी जैसे ही अन्य कई ग्रहों को कोई कैसे समझ सकता है लेकिन ब्रह्माण्ड की इन अनसुलझी पहेली को सुलझाना बहुत जरूरी है ये एलियंस कौन है और कहाँ से आते है और उनकी विकसित तकनीकी कितनी आगे है इस पर से पर्दा उठना बहुत जरूरी है


    जीके चक्रवर्ती

    क्या हमारे जैसी मानव सभ्यता और कहीं भी है? यह बड़ा सवाल आज भी लोगो के मन में लगभग हर रोज आता है वैज्ञानिक इस बात से इंकार नहीं करते और लगातार नित नई खोज करते है इस दिशा में उन्हें काफी हद तक सफलता प्राप्त ही हुयी भी है वह लगातार इस प्रयास मे है कि किसी तरह दूसरी दुनिया के प्राणी यानि एलियंस से संपर्क किया जाये ताकि उनकी वह उन्नत तकनीकी को समझा जाये जिससे वह पलक झपकते ही दूर चले जाते है या गायब हो जाते है। आज हमारी मानव सभ्यता विकास की उस ऊँचाई तक पहुँच चुकी हैं जहाँ से हम अपने उन प्राणियों के अस्तित्व को एवं उनके ग्रहों की खोज कर सके अपने आने वाली भावी पीढ़ी को इस दिशा में ले जा सके जो विज्ञानं की इस चुनातियों से पर्दा उठा सकें।

    आखिर एलियंस है क्या बला

    जहाँ तक हम एलियन्स की बात करें तो उसे विज्ञान एवं वैज्ञानिक भी उसे नहीं नकारते हैं, अब यहां इस बात पर तरह-तरह के प्रश्न उठना लाजमी है कि ये एलियंस है क्या बला ? कहाँ के प्राणी हैं ये? एलियंस को किसने कब और कहाँ देखा है? इसी तरह के अनेकों प्रश्नों के उत्तर में हमारे जाने माने वैज्ञानिक भी यह मानते हैं कि हमारे ब्रह्माण्ड में किसी दूसरे गृह में हमारे जैसी कोई दुनिया भी बसती है हम इस ब्रहाण्ड में अकेले नहीं है वहां भी हमारे जैसे प्राणी है जिसे हम एलियंस कहते है अभी हल ही के वर्षों में ऐसे कई गृह खोजे गए है जिन पर जीवन की प्रबल सम्भावना बनती है मानने वाले लोग तो यहाँ तक कहते हैं कि इस ब्रह्माण्ड में हमसे भी अधिक बुद्धिमान और ताकतवर एवं अत्याधुनिक तकनीक से लैस अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल करने वाले मानव हैं जो समय-समय पर हमें उनकी मौजूदगी की अहसास भी कराते रहते हैं, लेकिन इस तरह के संकेतों को पाने एवं जानने के बावजूद सरकारें हम से इस तरह की सच्चाइयों को छुपाया करती हैं।

    अभी कुछ साल पहले नासा पर आरोप लगाया गया कि उसने इंटरनेशनल एस्पेस स्टेशन से टेलीकास्ट होने वाली धरती के लाइव वीडियो फीड को अचानक रोक दिया क्योकि उसमे तीन उडनतश्तरियां दिखी जिन्हें गौर से देखने के बाद ऐसा लगता है कि यह उड़नस्तरियां पृथ्वी से लौटती हुई लगी उस वक्त ऐसा कहा गया कि जिस अपोलो -11 मिशन के जरिये इंसान ने चाँद पर पहला कदम रखा था, उस मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों से एलियन्स का सामना हुआ था।

    ऐसा भी कहा जाता हैं कि वर्ष 1947 में एक उडनतश्तरी दुर्घटना ग्रस्त भी हुई थी। केप्लर अंतरिक्ष यान के मिशन ने इस ब्रह्माण्ड में उपस्थित हजारों तारों एवं ग्रहों की तस्वीरें हमें भेज कर इस ओर इशारा कर चुकी हैं।

    एलियंस या UFO देखे जाने के मामले छुपा लिए जाते है

    अब तक हुए खोज में भारत में सात स्थानों पर इन एलियन्स के बसने या उतरने की बात बताई जाती है, इनमें से सबसे पहले स्थान के रूप में हिमालय का नाम लिया जाता है कुछ वैज्ञानिकों द्वारा इसे स्पष्ट रूप से स्वीकारा तो नहीं किया लेकिन वहीं भारतीय सेना एवं भारत तिब्बत सिमा पुलिस (आईटीबीपी) की यूनिट ने सन 2010 में जम्मू कश्मीर के लदाख क्षेत्र में उड़ने वाली अंजान वस्तुओं (यूएफओ) को देखे जाने की खबर दी, लेकिन बाद में बड़े स्तर से इस खबर को भी दबा दिया गया।
    हमारे ब्रह्माण्ड के आकार को लेकर आज भी मतभेद बने हुए हैं। अलग -अलग वैज्ञानिक अपने विभिन्न तर्क पिछले कई वर्षों से देते चले आ रहे हैं लेकिन इसमें अभी तक एक आम राय कायम नहीं हो पाई है!

    वेद- पुराणों में भी मौजूद है दूसरे गृह के प्राणियों का जिक्क्र

    दरअसल इस तरह के जटिल प्रश्नों का उत्तर हमारे वेद, पुरानों के पास पहले से ही मौजूद हैं। हिन्दू धर्म के दुर्लभ ग्रंथों में यूँ तो बहुत सी बेशकीमती पृथ्वी के अनेक रहस्यों से पर्दा उठाते हुए विभिन्न जानकारियों का संकलन उपलब्ध है साथ ही साथ उनके वैज्ञानिक कारणों और प्रमाण को बताया गया है लेकिन आज हमारी मानव सभ्यता के विकास को यहाँ तक आते- आते अनेक हिन्दू ग्रंथों का नाश होता चला गया। यहाँ तक भारत में मुग़लों और अंग्रेजों के शासन काल में, इन ग्रंथो का बहुतायत संख्या में भी प्रमाण नष्ट हुये फिर भी जो थोड़े बहुत ग्रन्थ मिलते हैं उनसे भी ऐसी उपयोगी जानकारियां उपलब्ध है जो आज के आधुनिक विज्ञान के वैज्ञानिको द्वारा कई वर्षों से हो रहे खोज के उपरांत भी अनेको रहस्यों से अभी भी पर्दा नहीं उठ सके।

    भारत के प्राचीन ज्ञान, विज्ञान और इतिहास के मूर्धन्य जानकार श्री डॉक्टर सौरभ उपाध्याय जी के अनुसार सूर्य देव के वरद शिष्य श्री वराह मिहिर जी के द्वारा लिखित ग्रन्थ में वर्णनो से इस ब्रह्माण्ड के आकार के विषय में लिखा मिलता है। हमारे ब्रह्माण्ड का निर्माण इस प्रकार से हुआ है की ये दिखने में दो आपस में उलटी रखी कड़ाहीयां है जैसे एक सीधी रखी कड़ाही (खाना बनाने वाली) उपर उलट कर दूसरी कड़ाही रख दी जाय तो जो एक अंडाकार आकर बनता है वैसी ही आकृति अपने इस ब्रह्माण्ड का है। पृथ्वी के इस अंडाकार आकृति के ठीक बीचो- बीच में इस तरह स्थित है जैसे कड़ाहियों का एक दूसरे के ऊपर उल्टा रखना इस बात का द्योतक है की हमारे ब्रह्माण्ड का दूसरा एक एंटी ब्रह्माण्ड भी मौजूद है।

    जब ब्रह्माण्ड में ॐ की ध्वनि भी बनी रहस्य

    पुराणों वेदों के अनुसार ब्रह्माण्ड का निर्माण ब्रह्मा जी ने ओंकार नाद (ॐ) की अनन्त शक्तियों से किया है। गायत्री मन्त्र समेत अन्य 7 करोड़ मन्त्र ओंकार से ही प्रकट हुए हैं इस बात के उदाहरण स्वरूप अभी अभी अमेरिका के स्पेस सेण्टर नासा ने अंतरिक्ष में गूंजने वाले आवाजो को रेकार्ड करके जब पुनः उसे सुना तो उसमें से ॐ की ध्वनि सुनाई दि इससे इस बात का प्रणाम मिलता है कि हमारे सभी ग्रंथो के मन्त्रों की अलग-अलग विशिष्ट भूमिकाएं हैं इस सृष्टि में गायत्री मन्त्र की अति विशिष्ट भूमिका है इस ब्रह्माण्ड के निर्माण में गायत्री मन्त्र ओंकार का ही विस्तार स्वरुप है।


    एरिया 51: पर आज भी रहस्य बरक़रार

    क्यों एरिया 51 एलियंस से जोड़कर देखा जाता है…

    एरिया 51 ऐसी जगह है, जिसके बारे में पूरी दुनिया को कुछ मालूम ही नहीं। इसके बारे में तो अमेरिकी सरकार ने भी अभी कुछ ही साल पहले कहा है कि वो जगह दुनिया में मौजूद है। पर इसके आगे अमेरिकी सरकार ने कुछ भी नहीं कहा। कहते है इस सीक्रेट जगह पर होती है एलियंस पर रिसर्च!

    कुछ लोगों का दावा है कि नासा के वैज्ञानिक भी यहां काम करते हैं। वो लगातार एलियंस से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। उनके विमानों पर शोध कर रहे हैं। और एलियंस का दिमाग पढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।


    भारत में एलियन्स भी देखी जाती हैं UFO

    भारत में एलियन्स से सम्बंधित घटनाओं में से एक घटना 20 अक्टूबर 2011 की सुबह 4.45 बजे ब्रह्मुहूर्त के समय रात की ड्यूटी पर तैनात भारतीय सेना के एक जवान ने एक तश्तरी के आकार वाला चमकती रोशनी से आच्छादित एक अंतरिक्ष यान सीमा रेखा के निकट के एक सीमांत बस्ती में उतरते देखा था।

    इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो में ये एलियंस की तस्वीर देखी जा सकती है

    दूसरी घटना इसी साल पन्द्रह फरवरी 2.15 बजे रात में भारत-चीन सीमा के करीब 0.25 किलोमीटर दूर एक छोटे से क्षेत्र के मैदान के करीब 500 मिटर ऊपर चमकदार सफेद रोशनी नजर आई ।

    इससे पहले भी लदाख में ऐसे प्रकाश पुंज छोड़ने वाले तश्तरीनुमा यान देखे जा चुके हैं। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर एवं चीन अधिकृत उक्साई चीन के मध्य 86,000 वर्ग किमी में फैले लदाख में सेना की भारी तैनाती हैं इस वर्ष लगातार आईटीवीपी ऐसे प्रकाश पुंज के देखे जाने की खबर से सेना की लेह स्थित 14वीं कोर में हलचल मचा दी।

    इन प्रकाश पुंजों को आँखों से देखा गया लेकिन वे राडार के पकड़ में नहीं आ सकें इससे यह साबित होता है कि इन प्रकाश पुंजों में धातुविक गुण नही होने के कारण वे हमारे रडार द्वारा पकडे नहीं जा सके।

    वहीं भारतीय वायु सेना ने वर्ष 2010 में ऐसी वस्तुओं को देखे जाने के बाद अपने जाँच में उन्हें इसे ‘चीनी लालटेन’ करार दिया था। पिछले एक दशक में युफओ UFO के दिखाई देने की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है।

    ऐसे ही एक और घटना जिससे एलियन्स के हजारों वर्ष पूर्व हमारे धरती पर आने बसने और रहने के संकेत प्राप्त होते है हमारे देश के ओडिशा प्रदेश में एक जगह की खुदाई के दौरान मिले एक ताड पत्र से पता चलता है कि वर्ष 1947 के दौरान भारत के आजादी से कुछ महीने पूर्व UFO की ओडिशा के जयागढ़ जिला में उतारते देखे जाने की बात कही गई। वहाँ के एक स्थानिय कलाकार पंचानन नोहरना ने इस घटना को एक ताडपत्र में लिखा था। इसी तरह नर्मदा का भी उल्लेख एलियन्स के रहने उतरने के उल्लेख मिलता है।

    छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में एक गुफा में 10 हजार वर्ष पुराने शैलचित्र के माध्यम से एलियन्स की मौजूदगी का पता चलता है भारतीय आर्कियोलॉजिकल की इस खोज से भारत में एलियन्स के रहने या आने की जैसी बातों को वल मिलता है।

    एलियन्स के आने जाने एवं रहने जैसी बातों की मजबूती में लोगों का ऐसा भी मानना है कि अजंता- एलोरा की गुफाओं के भीतर के हिस्से के नीचे एलियन्स का एक गुप्त शहर भी है यह स्थल हिन्दू बौद्ध, एवं जैन धर्म के प्रमुख स्थल हैं। आर्कियोजिकल एवं जियोलॉजिस्ट की अन्वेषण से इस बात का पता चला कि यह गुफा कोई साधारण गुफा नही है इन गुफाओं को कोई साधारण इंसान या आज की आधुनिक तकनीकी द्वारा भी नही बनाया जा सकता है। यहाँ पर एक ऐसी सुरंग है जो हमें अंडरग्राउंड शहर में ले जाती है। इसी तरह केरल के महाबलीपुरम में भी एलियन्स के आने के संकेत मिलते हैं।

    क्या आज हमारा विज्ञान एवं वैज्ञानिक इन एलियन्स की सभ्यता संस्कृतियों और उनके रहने के स्थान को ढूंढने में कामियाब होंगे? हमारे आकाश गंगा के बहुत से तारों के पास उनका अपना सौर मंडल है। एलियन्स द्वारा भेजे गए रेडियों तरंगों को पकड़ने के लिए हमारी धरती पर मौजूद दो सबसे बड़े टेलिस्कोप CSIRO के 64m Parkes और NRAO’S के Green Banks का इस्तेमाल हो रहा है, इसके अलावा मार्स पर भेजे गए रोवर्स ने तो कई चौकाने वाले फोटो भी भेजे है जिससे प्रमाणित होता है कि उनकी मौजूदगी हमारी पृथ्वी ही नहीं वरन अन्य ब्रह्माण्ड के और भी गृह है जहाँ वह कही न कही हमारी मानव सभ्यता से टकरा जाते है लेकिन उनका वास्तव में क्या मोटिव है यह तो पूरी तरह से उनसे कमुनिकसेशन के बाद ही मालूम चलेगा।

    अभी हाल ही में लंदन के  शोधकर्ताओं द्वारा अंतरिक्ष से लाये गए कुछ मलबे में एक छाया की आकृति की तरह का ‘घोस्ट पार्टिकल’ को खोजने में सफलता पाई है, जिससे इस अंतरिक्ष में एलियनस की मौजूदगी की संभावनाएँ बढ़ गई है।

    घोस्ट पार्टिकल’ एक ‘लिविंग बैलून

    यूके के शेफील्ड यूनिवर्सिटी में एस्ट्रोबॉयलोजी केंद्र के शोधकर्ताओं द्वारा इस मलवे में से एक छोटा से अंश को खोज निकाला है और जिसका नाम शोधकर्ताओं द्वारा ‘लिविग बैलून’ रखा गया है। उन शोधकर्ताओं का ऐसा मानना था कि इसका उपयोग कभी एलियनो के सूक्ष्म शारीरिक बनावट को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। शोधकर्ताओं का यह भी दावा है कि ‘घोस्ट पार्टिकल’ स्पष्ट तौर पर इशारा करता है कि अंतरिक्ष में एलियन की मौजूदगी अवश्य है।
    उन शोधकर्ता में से ‘मिल्टन वेनराइट’ का कहना है कि इस मलवे से ढूंढा गया पार्टिकल जाली दार दुपट्टे से मिलता-जूलता है जिसकी चौड़ाई मनुष्य के बाल जैसी है एवं इसे पृथ्वी के समताप मंडल (स्ट्रेटस्फीयर) के 27 किलोमीटर ऊँचाई पर पाया गया है एवं यह पार्टिकल यह कार्बन एवं ऑक्सीजन से निर्मित अपने प्रकृति में जैविक है।
    शोधकर्ता वेनराइट के मुताबिक वे इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि इस अंतरिक्ष के वातावरण में यह ‘घोस्ट पार्टिकल’ एक ‘लिविंग बैलून’ है जिससे एक एलियन एक जगह से दूसरे जगह जाने में इस्तेमाल कर सकते है। इस तरह शोधकर्ता वेनराइट का मानना है कि इस तरह का पार्टिकल वर्त्तमान समय तक कभी नहीं मिला है।

    पढ़ें इससे सम्बंधित खबर:

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    4 Comments

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