जी के चक्रवर्ती
फिल्म इंडस्ट्री में वैसे तो एक से एक प्रसिद्ध गायक, गायिकाओं से भरें पड़े हैं लेकिन उनमे से कुछ एक ऐसे भी नाम हैं जो किसी परिचय के मोहताज नहीं है उनकी आवाज ही उनकी पहचान है, कहीं दूर जब उनका गाना बजता तो लोग आवाज से ही उन्हें पहचान लेते लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जिनके जीवन में बहुत सारे उठा पटक के बीच गुजरती है जिसके कारण उनकी काबलियत निखर कर सामने नहीं आ पाती है, ऐसी ही एक शख्सियत आधुनिक भारत की मीरा कहलाने वाली “वाणी जयराम” थी उनकी आवाज ऐसी थी कि जो आज की लता मंगेशकर की आवाज के आसपास ठहरती है।
उन्होंने हिन्दी भाषा में लगभग 300 गाने गए हैं और 18 भारतीय भाषाओं में 10 हजार से अधिक भाषाओं में जैसे तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, हिंदी, उर्दू, मराठी, बंगाली, भोजपुरी, तुलु और उड़िया जैसे अनेकों भारतीय भाषाओं में कई गाने गाए है। जिनमें से कुछ हिन्दी गानों को बहुत प्रसिद्धी मिली जैसे गुड्डी फिल्म का एक गाने के बोल “बोले रे पपीहरा” और “हमको मन की शक्ति देना” जैसे गाने बहुत प्रसिद्ध हुये है।
हालाँकि, सही मायने में कहा जाए तो हिंदी गानों ने उनके वृत्ति को रोक दिया था। यह आरोप चाहे आंशिक रूप से ही सह हो लेकिन यह विश्वास कि लता मंगेशकर ने वाणी के करियर की उड़ान को स्थिर कर दिया खैर इस तरह की बाते हास्यास्पद रूप से अमान्य किया जा सकता है। शायद असफल गायिकाओं ने ही ऐसा आरोप लगाये है। यहाँ तक कि लताजी और वाणी के साये में रहने वाली “सुमन कल्यापुर” ने इस बात को स्वीकार किया कि उनके मन में उनका बहुत बड़ा सम्मान था।
वाणी को सबसे बड़ा ब्रेक वर्ष 1971 में गुड्डी फ़िल्म के इसी गाने से मिली। वैसे इन्होने कई दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया जिनमे एमएस विश्वनाथन, सत्यम, चक्रवर्ती केवी महादेवन और इलैयाराजा थे।
वर्ष 2018 में वाणी जयराम ने अपनी मां की निराशा के लिए हिंदी फिल्मी संगीत की एक कट्टर प्रेमी बन गई, वैसे उनकी मां ने उन्हें कर्नाटक शास्त्रीय संगीतकार बनने के लिए प्रशिक्षित किया था। उन्हें तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है और इस वर्ष उन्हें भारत की सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से भी नवाजा जाना था।
वाणी जयराम ने अलग-अलग फिल्म इंडस्ट्री के कुछ एक बड़े संगीतकारों के साथ काम किया और सिनेमा जगत को कई सदाबहार चार्टबस्टर्स गाने दिए। इन सबके अतिरिक्त उन्होंने देश और दुनिया भर में अनेकों मंचों पर भी गाने प्रस्तुत किये। उन्हें तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, केरल, गुजरात और ओडिशा जैसे प्रदेशों के राज्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका था।
जब हम उनके व्यक्तिगत जीवन की बात करते हैं तो वाणी जयराम की शादी एक ऐसे परिवार में हुई थी, जहां संगीत का माहौल शुरू से ही था। वाणी के गायन से उनके पति बहुत प्रभावित थे तो जयराम ने उन्हें हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण पटियाला घराने के उस्ताद अब्दुल रहमान खान से दिलवाया संगीत सीखने के दौरान वाणी ने बैंक की नौकरी छोड़ कर संगीत को अपना पेशा बनाने का मन बना लिया। संगीत में उन्होंने ठुमरी, ग़ज़ल और भजन गायिकी के गुण सीखे और वर्ष 1969 में उन्होंने अपना पहला संगीत प्रदर्शन किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात संगीतकार वसंत देसाई से हो गई तो इन्होने वाणी की आवाज सुनी और अपने एल्बम के लिए उन्हें गाना गाने का मौका दिया। यह एल्बम मराठी लोगो के बीच बहुत प्रचालित हुआ और इसके बाद से उन्होंने कभी मुड़ कर नहीं देखा।
स्वम उनकी सास भी एक गायिका और उनकी भाभी एन. राजम एक अच्छी वॉयलिन वादक होने के साथ साथ बनारस हिंदू विश्विद्यालय में प्रवक्ता भी हैं। वर्ष 1969 में जयराम से विवाह कर वाणी मुंबई आ गई थीं और उन्होंने अपनी बैंक की नौकरी को यहां स्थानान्तरित करा लिया था लेकिन उनके पति हमेशा उन्हें संगीत की दुनिया में ही कुछ करने के लिये प्रेरित करते रहे।
4 फरवरी 2023 के दिन फिल्म इंडस्ट्रीज की एक मधुर आवाज की बोल के धनी एक व्यक्तित्व हमेशा हमेशा के लिए खामोश हो गई। उनकी मृत्यु की खबर से पुरे फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई।







