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    आमलकी एकादशी 27 फरवरी को : व्रत, जागरण या आंवला पूजा करने से मिट जायेंगे पाप, मोक्ष की होगी प्राप्ति

    ShagunBy ShagunFebruary 22, 2026 धर्म-कर्म No Comments4 Mins Read
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    vishnu bhagwan ji
    देवोत्थान एकादशी: जागो हे विष्णु, जग का कल्याण करो
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    आमलकी एकादशी की सरल व्रत कथा (फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी- आंवला एकादशी या रंगभरी एकादशी)

    प्रस्तुति : नीतू सिंह

    एक बार राजा मान्धाता ने महर्षि वशिष्ठ से पूछा – “हे गुरुजी! ऐसा कौन सा व्रत है जो मेरे लिए कल्याणकारी हो और मोक्ष तक ले जाए?”

    महर्षि वशिष्ठ बोले – “हे राजन! सभी व्रतों में सबसे उत्तम आमलकी एकादशी है। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आती है। इसका व्रत करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और एक हजार गायों के दान जितना पुण्य मिलता है।

    तो आइए जानते हैं इसकी पौराणिक कथा…

    बहुत समय पहले वैदिश नाम का एक राज्य था। वहाँ चंद्रवंशी राजा चैतरथ राज्य करते थे। पूरा राज्य भगवान विष्णु का भक्त था। सभी लोग – राजा से लेकर प्रजा तक – एकादशी का व्रत रखते थे, भगवान की पूजा करते थे और पाप से दूर रहते थे। राज्य में सुख-शांति थी, कोई गरीब या दुखी नहीं था।

    एक बार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष में आमलकी एकादशी आई। राजा, रानी, प्रजा, बच्चे-बूढ़े सबने बड़े उत्साह से व्रत रखा। सब मंदिर गए। वहाँ कलश स्थापित किया, धूप-दीप जलाए, फूल-नैवेद्य चढ़ाए और आंवले के पेड़ की विशेष पूजा की। रात भर जागरण किया, भजन-कीर्तन किए।

    उसी समय जंगल में एक पापी शिकारी रहता था। वह रोज पशु-पक्षी मारकर अपना गुजारा करता था। आमलकी एकादशी की रात वह भूखा-प्यासा जंगल में भटक रहा था। रात गहर गई तो थककर एक आमलकी (आंवले) के पेड़ के नीचे सो गया।

    उस रात मंदिर से भजन-कीर्तन की ध्वनि आ रही थी। शिकारी ने अनजाने में पूरी रात जागरण कर लिया (क्योंकि नींद नहीं आई)। सुबह उठा तो उसके मन में बड़ा बदलाव आ गया। वह पछतावा करने लगा। उसी दिन से उसने पाप छोड़ दिया, व्रत-उपवास करना शुरू किया और भगवान विष्णु की भक्ति में लग गया।

    आमलकी एकादशी के प्रभाव से उसके सारे पाप नष्ट हो गए और मरने के बाद वह विष्णुलोक (वैकुंठ) को प्राप्त हुआ।

    कथा का सार क्या कहता है : आमलकी एकादशी का व्रत और आंवले के पेड़ की पूजा से भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं। अनजाने में भी अगर कोई इस दिन व्रत रखे, जागरण करे या आंवला पूजे, तो उसके पाप मिट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    इसलिए इस एकादशी पर भगवान विष्णु और आंवले की पूजा जरूर करें, कथा सुनें और व्रत रखें – सुख, समृद्धि और मोक्ष मिलेगा!

    जय श्री हरि! जय आमलकी एकादशी!

    आमलकी एकादशी कब है?

    इस साल (2026) आमलकी एकादशी (जिसे आंवला एकादशी या रंगभरी एकादशी भी कहते हैं) 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है।

    एकादशी तिथि शुरू:

    26 फरवरी रात 12:33 बजे (लगभग)
    तिथि समाप्त: 27 फरवरी रात 10:32 बजे
    व्रत रखने का दिन: 27 फरवरी (सूर्योदय पर तिथि व्याप्त होने से)
    पारण (व्रत तोड़ने) का समय: 28 फरवरी सुबह 6:47 से 9:06 बजे तक (स्थानीय पंचांग से थोड़ा अंतर हो सकता है, अपने क्षेत्र का चेक करें)

    ये समय दिल्ली/उत्तर भारत के अनुसार हैं। होली से ठीक पहले पड़ने वाली ये एकादशी बहुत पुण्यदायी मानी जाती है।

    आमलकी एकादशी की सरल पूजा विधि

    • ये व्रत भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ को समर्पित है। पूजा बहुत सरल है, घर पर आसानी से कर सकते हैं:सुबह उठकर: ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करें। पीले रंग के कपड़े पहनें (भगवान विष्णु को पीला प्रिय है)।
    • संकल्प लें: भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें – “आज मैं आमलकी एकादशी का व्रत रखूंगा, पाप नाश और मोक्ष के लिए।”

    पूजा स्थल तैयार करें:

    • भगवान विष्णु की मूर्ति या फोटो स्थापित करें।
    • अगर आंवले का पेड़ उपलब्ध हो तो उसके नीचे पूजा करें, वरना घर में आंवले का फल या पत्ता रखें।
    • दीया, धूप, अगरबत्ती जलाएं।

    पूजन सामग्री चढ़ाएं:

    • पीले फूल, चंदन, तुलसी दल, अक्षत, आंवला फल या चूर्ण।
    • भगवान को आंवला अर्पित करें (भगवान विष्णु को आंवला बहुत प्रिय है)।
    • भोग में फल, मिठाई, दूध या खीर लगाएं – तुलसी दल जरूर डालें।

    मंत्र जाप और कथा:

    • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या विष्णु सहस्रनाम का जाप करें।
    • आमलकी एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
    • शाम को तुलसी के पास दीया जलाएं, जागरण करें।

    आरती और प्रदक्षिणा: विष्णु आरती करें। आंवले के पेड़ की 7 बार परिक्रमा करें (अगर संभव हो)।
    व्रत नियम: फलाहार या निर्जला व्रत रखें। मांस-मदिरा, तामसिक भोजन से दूर रहें।

    विशेष टिप: अगर आंवला उपलब्ध न हो तो सिर्फ भगवान विष्णु की पूजा और तुलसी अर्पण से भी फल मिलता है। व्रत से पाप नाश, स्वास्थ्य, धन और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    जय श्री हरि! इस एकादशी पर व्रत रखकर भगवान की कृपा प्राप्त करें।

    Shagun

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