महिलाओं का आक्रोश: अनिरुद्धाचार्य के बयान के खिलाफ वाराणसी में उग्र प्रदर्शन
वाराणसी: कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के विवादास्पद बयान “लड़कियां मुंह मारती हैं” पर महिलाओं का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को वाराणसी की सड़कों पर महिलाओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ जुलूस निकाला, उनके पुतले पर चप्पलें बरसाईं, फिर जमीन पर पटककर लातों से कुचल दिया। आक्रोशित महिलाओं ने कथावाचक को नारी विरोधी बताते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो महिलाओं के बीच फैले आक्रोश को दर्शाता है।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने नारेबाजी करते हुए कहा कि अनिरुद्धाचार्य जैसे लोग समाज में महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी ने बताया, “ऐसे बयान न केवल अपमानजनक हैं, बल्कि महिलाओं को छोटा करने की कोशिश हैं। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।” जुलूस के दौरान पुतले को आग के हवाले करने की भी कोशिश की गई, जो इस विवाद की गंभीरता को उजागर करता है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया, लेकिन महिलाओं का आक्रोश कम होने के संकेत नहीं मिले।

यह पहली बार नहीं है जब अनिरुद्धाचार्य अपने विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में आए हैं। जुलाई 2025 में उन्होंने 25 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित महिलाओं के चरित्र पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद मथुरा बार एसोसिएशन और विभिन्न महिला संगठनों ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। उस समय अनिरुद्धाचार्य ने माफी मांगकर विवाद को शांत करने की कोशिश की, लेकिन उनका यह नया बयान फिर से तूफान खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल पुराने वीडियो में उनका यह बयान सामने आया, जो लिव-इन रिलेशनशिप पर टिप्पणी के रूप में दिया गया था। अनिरुद्धाचार्य ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनका इशारा सभी लड़कियों पर नहीं, बल्कि कुछ खास मामलों पर था, लेकिन इससे विवाद और बढ़ गया।

इस घटना ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर #Anirudhacharya, #WomenProtest और #Varanasi जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कई यूजर्स ने महिलाओं के विरोध को सही ठहराया, जबकि कुछ ने अनिरुद्धाचार्य के बयान को संदर्भ से हटकर बताया। महिला अधिकार संगठनों ने मांग की है कि ऐसे बयानों पर सख्त एक्शन लिया जाए, ताकि समाज में लिंग समानता को बढ़ावा मिले। अनिरुद्धाचार्य की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।
यह प्रदर्शन न केवल वाराणसी तक सीमित रहा, बल्कि अन्य शहरों में भी महिलाओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक कथावाचकों को अपनी भाषा पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि उनके शब्द लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। यदि अनिरुद्धाचार्य जल्द ही माफी नहीं मांगते, तो यह विवाद और भड़क सकता है। फिलहाल, महिलाओं का संघर्ष जारी है, जो समाज में सम्मान और समानता की मांग को बुलंद कर रहा है।







