लखनऊ महोत्सव नाट्य रंग उत्सव: आखिरी शाम

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  • गेमिंग की लत से आगाह करता ‘डेथ टैप’
  • सुशील कुमार सिंह ‘रंगलेखन सम्मान’ से अलंकृत
  • नाटिका ‘स्वच्छता हम सबकी जिम्मेदारी’ ने किया जागरूक

लखनऊ, 02 फरवरी। नाटक ‘डेथ टैप’ व नाटिका ‘स्वच्छता हम सबकी जिम्मेदारी’ का मंचन लखनऊ महोत्सव के अंतर्गत थियेटर एवं फिल्म वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा उ.प्र.संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से गोमतीनगर अकादमी मुक्ताकाश मंच पर 29 जनवरी से प्रारम्भ पांच दिवसीय लखनऊ महोत्सव नाट्य रंग उत्सव की आखिरी शाम आज हुआ। समापन अवसर पर सुप्रसिद्ध रंग निर्देशक व लेखक सुशील कुमार सिंह को उनके योगदान के लिए ‘रंगलेखन सम्मान’ से अलंकृत किया गया।

सम्मानित लेखक श्री सिंह ने एसोसिएशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अच्छी बात है कि आज की नई पीढ़ी रंगकर्म के साथ नाट्य लेखन में भी सक्रिय है और अच्छे विचार सामने आ रहे हैं किंतु इस नई पीढ़ी को लेखन में बेहतर मार्गदर्शन लेना होगा। एसोसिएशन के मुख्य संरक्षक राजवीर रतन व अनिल मिश्र गुरुजी, सचिव दबीर सिद्दीक़ी के साथ अवध कम्बाइन नाट्य एकेडमी के इमरान खान ने उन्हें सम्मानित किया। रियल्टी षो विनर गायक संदीप राय के संचालन में चले कार्यक्रम में ज्वाइन हैण्ड्स फाउण्डेशन, विपिन प्रियंका प्रोडक्षन, आर्यन मिश्र आदि का सहयोग पूरे रंग उत्सव में रहा।

संचार साधन इंटरनेट-मोबाइल के जरिए समूचा विष्व एक गांव सरीखा बन चुका है, जहां इसके अनेक फायदे दुनिया को मिल रहे हैं वहीं हाल के वर्षों में यह नेट गेमिंग की गिरफ्त में आई खासकर नई पीढ़ी के लिए घातक भी साबित हुआ है। दुनिया में 250 से ज्यादा लोगों की जान ले चुके ब्लू व्हेल गेम को केन्द्र में रखकर नवयुवा पीढ़ी को जागरूक करने का संदेष कम्यूनिकेशन सोसायटी की ओर से नार्वे के सुरेशचन्द्र शुक्ल द्वारा लिखे नाटक का मंचन आनन्द षर्मा के निर्देषन मे प्रस्तुत नाटक ‘डेथ टैªप’ ने दिया। आत्महत्या का प्रयास से रोककर नाटक के प्रमुख पात्र नवयुवक दीपक को पिता उसकी मांग के अनुसार 20 हजार रुपये दे देते हैं।

इस पैसे से वह मोबाइल मंगाता है और उसे धीरे-धीरे नेट गेमिंग के बाद खतरनाक गेम ब्लू व्हेल की लत लग जाती है। घर वालों को उसकी शर्ट पर लगे खून व हाथ पर गोदे मछली के निशान से पता लग जाता है, वे उसे अकेला नहीं छोड़ते और उसपर निगाह रखना शुरू कर देते हैं। अंततः उसे गेम का अंतिम टास्क छत से कूदने का मिलता है। वह निगाह बचाकर छत पर आता है किन्तु कूदने से पहले उसकी अंतरआत्मा जाग उठती है। बीता जीवन याद करते उसे लगता है कि सब उसे कितना चाहते हैं। फिर भी वह कूदना चाहता है कि पिता आ जाते हैं और नाटक के सुखद अंत में इच्छाशक्ति की बदौलत एक जवान जीवन बच जाता है। इससे पहले प्रस्तुत विजय बेला संस्था के नैनिका रमोला के निर्देशन व चन्द्रभाष सिंह की अवधारणा में फिल्म बाहुबली के प्रभाव में प्रस्तुत रोचक नाटिका ‘स्वच्छता हम सबकी जिम्मेदारी’ में निषा तिवारी, मोहन सोनी, माधुरी सिंह, सुजीत कुमार, शुभम गौतम, पंकजकुमार, पिंकी शुक्ला, तारा उप्रेती व हरिओम सिंह ने अभिनय कर आम नागरिकों को सफाई के प्रति उनकी जिम्मेदारी के लिए जागरूक किया।

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नाटक में प्रमुख भूमिकाएं जमील खान, दीपक शर्मा, फिरदौस हुसैन, अक्षयदीप गौड़, अल्तमस आजमी, इजहार हुसैन व अक्सा ने निभाई तो मंच के पीछे रंगदीपन में सहनिर्देशक संजय त्रिपाठी, संगीत में आदित्य लिप्टन, वेशविन्यास में रष्मि त्रिपाठी, रूपसज्जा में अनामिका शुक्ला व अन्य पक्षों में धु्रव तिवारी, अजय कुमार, सचिन सिंह व संतोष कुमार सिंह ने अच्छा काम किया।

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