रोहित द्विवेदी की पिटाई और विवाद का पूरा सच
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई, जब रायबरेली में 6 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य पर हमले की घटना सामने आई। यह घटना न केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी, बल्कि कानून-व्यवस्था और धार्मिक भावनाओं से जुड़े सवाल भी खड़े कर रही है। हमलावर, जिसकी पहचान रोहित द्विवेदी के रूप में हुई, ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर हमला किया, लेकिन मौर्य के समर्थकों ने उसे पकड़कर बुरी तरह पीटा। इस घटना ने सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के मीडिया तक तूफान मचा दिया। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
क्या हुआ था रायबरेली में?
रायबरेली के मिल एरिया थाना क्षेत्र में सारस चौराहे पर स्वामी प्रसाद मौर्य फतेहपुर जाते समय रुके थे। वहां उनके समर्थक फूल-मालाओं के साथ उनका स्वागत करने जुटे थे। इसी दौरान भीड़ में मौजूद दो युवक, रोहित द्विवेदी और शिवम यादव, माला पहनाने की आड़ में मौर्य के करीब पहुंचे। अचानक रोहित द्विवेदी ने मौर्य के सिर पर थप्पड़ मारने की कोशिश की, जो हल्का-सा मौर्य को लगा और पास खड़े एक कार्यकर्ता को भी छू गया। इस अप्रत्याशित हमले से मौर्य के समर्थक भड़क गए और उन्होंने दोनों हमलावरों को पकड़कर उनकी जमकर पिटाई की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें रोहित द्विवेदी को लहूलुहान हालत में देखा जा सकता है।
मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों हमलावरों को हिरासत में ले लिया। मिल एरिया थानाध्यक्ष अजय राय के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू की गई है। लेकिन यह घटना यहीं खत्म नहीं होती, इसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

हमलावर का दावा: सनातन धर्म के अपमान का बदला
पुलिस हिरासत में रोहित द्विवेदी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उसने स्वामी प्रसाद मौर्य पर हमला इसलिए किया क्योंकि मौर्य बार-बार सनातन धर्म का अपमान करते हैं। उसने कहा, “स्वामी प्रसाद मौर्य ने हमारे भगवान को अपशब्द कहे और सनातन धर्म का विरोध किया, इसलिए हमने यह कदम उठाया।” रोहित ने खुद को करणी सेना से जुड़ा बताया, हालांकि करणी सेना ने इस हमले से आधिकारिक तौर पर पल्ला झाड़ लिया है।
स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से इस हमले को सियासी साजिश करार दिया गया। उन्होंने करणी सेना पर निशाना साधते हुए कहा कि यह हमला उनकी आवाज को दबाने की कोशिश है। मौर्य ने यह भी कहा, “मैं डरने वाला नहीं हूं। यह हमला मेरे हौसले को और मजबूत करेगा।”
स्वामी प्रसाद मौर्य और विवादों का पुराना नाता
स्वामी प्रसाद मौर्य का नाम उत्तर प्रदेश की राजनीति में कोई नया नहीं है। पांच बार विधायक रहे मौर्य बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), और समाजवादी पार्टी (सपा) जैसी प्रमुख पार्टियों में रह चुके हैं। वर्तमान में वह अपनी पार्टी, राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी, के अध्यक्ष हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी घोषित किए गए हैं।
बता दें कि मौर्य अपने बयानों के लिए अक्सर विवादों में रहते हैं। खासकर, उनके सनातन धर्म और हिंदू धार्मिक ग्रंथों, जैसे रामचरितमानस, पर दिए गए बयानों ने कई बार हिंदू संगठनों का गुस्सा भड़काया है। 2023 में रामचरितमानस पर उनकी टिप्पणी के बाद संत-महंतों और हिंदू संगठनों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। हाल ही में कांवड़ियों को लेकर उनके बयान, जिसमें उन्होंने कुछ कांवड़ियों को “सरकार द्वारा संरक्षित गुंडे” बताया, ने भी बड़ा बवाल मचाया था। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने उनके आवास पर “जलाभिषेक” की घोषणा की थी, जिसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ानी पड़ी।
कौन है यह हमलावर रोहित द्विवेदी ?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रोहित द्विवेदी के बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं है, सिवाय इसके कि उसने खुद को करणी सेना का सदस्य बताया। उसका दावा है कि मौर्य के सनातन विरोधी बयानों ने उसे हमला करने के लिए उकसाया। हालांकि, मौर्य के समर्थकों ने उसे “ब्राह्मणवादी” और “सियासी गुंडा” करार देते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने रोहित की पिटाई का समर्थन किया, तो कुछ ने इसे कानून-व्यवस्था की नाकामी बताया।
क्या हैं इस घटना के मायने: क्या यह व्यक्तिगत रंजिश थी?
यह हमला कई सवाल उठाता है। पहला, क्या यह व्यक्तिगत रंजिश थी, धार्मिक भावनाओं का मामला था, या फिर सियासी साजिश? मौर्य की विवादित छवि और उनके बयानों ने निश्चित रूप से कुछ संगठनों और व्यक्तियों को नाराज किया है, लेकिन क्या यह हिंसा का आधार बन सकता है? दूसरा, उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। अगर एक पूर्व कैबिनेट मंत्री पर इस तरह हमला हो सकता है, तो आम नागरिक की सुरक्षा का क्या? तीसरा, मौर्य के समर्थकों द्वारा हमलावर की पिटाई ने भीड़तंत्र की मानसिकता को उजागर किया है।
इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि धार्मिक और सियासी बयानबाजी कितनी खतरनाक हो सकती है। मौर्य के बयानों ने जहां कुछ लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई, वहीं हमलावर की हरकत ने हिंसा को बढ़ावा दिया। दोनों पक्षों की कार्रवाइयों ने समाज में तनाव को और बढ़ाने का काम किया है।
पुलिस ने की मामले की जांच शुरू
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और दोनों हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। लेकिन यह घटना उत्तर प्रदेश की सियासत में लंबे समय तक गूंजेगी। मौर्य ने इसे अपनी आवाज को दबाने की साजिश बताया है, जबकि उनके विरोधी इसे उनके बयानों का नतीजा मान रहे हैं। इस बीच, सोशल मीडिया पर मौर्य के समर्थक और विरोधी एक-दूसरे पर हमलावर हैं।







