हिसार, 4 सितंबर 2025: स्वयंभू संत और सतलोक आश्रम के प्रमुख बाबा रामपाल को एक बड़ा कानूनी राहत मिली है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 2014 के हिसार हिंसा मामले में उनकी आजीवन कारावास की सजा को सस्पेंड कर दिया, जिसमें चार महिलाओं और एक 18 महीने के बच्चे की मौत हुई थी। यह फैसला जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और दीपिंदर सिंह नलवा की बेंच ने सुनाया, जिसमें रामपाल की उम्र (74 वर्ष), 10 वर्ष 8 माह की जेल अवधि, और सबूतों में अस्पष्टता को आधार बनाया गया।
क्या था मामला?
नवंबर 2014 में हरियाणा के बरवाला (हिसार) स्थित सतलोक आश्रम में पुलिस और रामपाल के समर्थकों के बीच हिंसक टकराव हुआ था। रामपाल को 2006 के एक हत्या के मामले में गिरफ्तारी के लिए पुलिस पहुंची थी, लेकिन उनके 15,000 समर्थकों ने आश्रम को घेर लिया और पुलिस पर पेट्रोल बम, एसिड, और हथियारों से हमला किया। इस स्टैंडऑफ के दौरान चार महिलाओं (सुमन, पुष्पा, निक्की, रीना) और एक बच्चे की मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम में दम घुटने (एस्फिक्सिया) को कारण बताया गया, जो आंसू गैस, भगदड़, या बंद कमरों में कैद होने से हुआ। पुलिस ने रामपाल पर समर्थकों को उकसाने और मानव ढाल बनाने का आरोप लगाया। 19 नवंबर 2014 को रामपाल की गिरफ्तारी हुई, और 2018 में हिसार कोर्ट ने उन्हें और 26 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने सजा सस्पेंड करते हुए कहा कि मौतों का कारण “होमिसाइडल” साबित नहीं हुआ, और मृतकों के रिश्तेदारों ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया। रामपाल को जमानत मिल सकती है, लेकिन सख्त शर्तें हैं। वे “मॉब मेंटालिटी” को बढ़ावा नहीं देंगे और शांति भंग करने वाली सभाएं नहीं करेंगे। अपील की सुनवाई बाकी है, जिसमें अंतिम फैसला आएगा, या तो बरी, या सजा बरकरार।
विवाद और जनता की प्रतिक्रिया
यह फैसला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, और लोग इसे “अंधभक्ति” और “वोट बैंक की ताकत” से जोड़ रहे हैं। रामपाल के लाखों भक्त उन्हें “जगतगुरु” मानते हैं, और हरियाणा में उनके जाट समुदाय में गहरे प्रभाव को देखते हुए यह मामला राजनीतिक रंग भी ले सकता है। कोर्ट ने 2018 में ही “फर्जी बाबाओं” की लिस्ट बनाने की सिफारिश की थी, लेकिन यह मामला फिर से बहस छेड़ रहा है।
अब क्या हो सकता है आगे ?
रामपाल पर सेडिशन और अन्य केस भी लंबित हैं। अगर अपील में वे बरी हुए, तो पूरी तरह रिहा हो सकते हैं; अन्यथा, जेल वापसी होगी। यह मामला कानून, आस्था, और सत्ता के बीच की जटिल कड़ी को उजागर करता है।
आसाराम बापू की जेल में स्थिति
नाबालिग से बलात्कार के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम बापू (84) की सेहत जोधपुर सेंट्रल जेल में बिगड़ गई है। हृदय रोग और उम्र-संबंधी समस्याओं के कारण उन्हें अब व्हीलचेयर की जरूरत है। राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 अगस्त 2025 को जमानत याचिका खारिज कर जेल में व्हीलचेयर और सहायक कर्मचारी की सुविधा देने का आदेश दिया। जेल में चिकित्सा सुविधाएं हैं, लेकिन बिगड़ते स्वास्थ्य पर सवाल उठ रहे हैं।







