सियार और बोलती गुफा का सच

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हम सबने एक कहावत जरूर सुनी होगी- ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’. हालांकि, इस पर अमल बहुत कम लोग ही करते हैं. इसका नुकसान हमें अपने जीवन के हर क्षेत्र में उठाना पड़ता है. सिर्फ सतर्क रह कर कई बार हम बहुत बड़े नुकसान से बच सकते हैं. इसी बात पर आपको एक चतुर सियार की कहानी सुनाते हैं.

एक बार जंगल में एक शेर के पैर में कांटा चुभ गया. इससे उसके पंजे में जख्म हो गया. उसके लिए दौड़ना मुश्किल हो गया और वह शिकार करने में असमर्थ हो गया. कहते हैं कि शेर मरा हुआ जानवर नहीं खाता, लेकिन मजबूरी में सब कुछ करना पड़ता है. लंगड़ा शेर किसी घायल अथवा मरे हुए जानवर की तलाश में जंगल में भटकने लगा. यहां भी किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया. कहीं कुछ हाथ नहीं लगा.

धीरे-धीरे पैर घसीटता हुआ वह एक गुफा के पास आ पहुंचा. शेर ने उसके अंदर झांका, मांद खाली था, लेकिन उसे इस बात के प्रमाण नजर आये कि इसमें जानवर का बसेरा है. शेर चुपचाप बैठ गया, ताकि उसमें रहने वाला जानवर लौट आये, तो वह उसे दबोच ले. उस गुफा में सियार रहता था. सियार काफी बुद्धिमान था.

हर समय चौकन्ना रहता था. उसने अपनी गुफा के बाहर बड़े जानवर के पैरों के निशान देखे, तो चौंका. उसने एक चाल चली. गुफा से दूर जाकर उसने आवाज दी- गुफा, ओ गुफा. गुफा में चुप्पी छायी रही. उसने फिर पुकारा, गुफा! रोज तू मेरी पुकार के जवाब में मुझे अंदर बुलाते हो. आज चुप क्यों हो? मैंने पहले ही कह रखा है कि जिस दिन तुम मुझे नहीं बुलाओगे, उस दिन मैं किसी दूसरी गुफा में चला जाऊंगा.

यह सुनकर शेर ने सोचा, शायद गुफा सचमुच सियार को अंदर बुलाता होगा. उसने अपनी आवाज बदल कर कहा, सियार राजा, अंदर आओ. सियार शेर की आवाज पहचान गया और उसकी मूर्खता पर हंसता हुआ वहां से चला गया और फिर लौट कर नहीं आया. जिस तरह सतर्क रह कर सियार शेर के जाल में फंसने से बच गया, उसी तरह चौकन्ना और सतर्क रह कर मुश्किलों से बच सकते हैं.

शिक्षा: सावधान रहेंगे, तभी मुश्किलों से भी दूर रहेंगे

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