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    Home»धर्म»Spirituality

    जेठ माह का मंगल अवध में क्यों बना बड़ा मंगल!

    ShagunBy ShagunMay 27, 2026 Spirituality No Comments3 Mins Read
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    Why did the Tuesday of the month of Jeth become a big Tuesday in Awadh?
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    राहुल कुमार

    जेठ की तपती दुपहर में लखनऊ और अवध क्षेत्र की गलियों में सिर्फ लू के थपेड़े नहीं, बल्कि श्रद्धा और सेवा की एक ठंडी बयार भी बहती है। ‘बड़ा मंगल’ अवध की उस महान गंगा-जमुनी तहजीब का जीवंत दस्तावेज है, जिसकी शुरुआत नवाबों के आंगन से हुई थी। लोक कथाओं के अनुसार, जब नवाब वाजिद अली शाह की बेगम आलिया की मन्नत अलीगंज के प्राचीन हनुमान मंदिर में पूरी हुई, तो नवाब ने न केवल मंदिर का जीर्णोद्धार कराया, बल्कि उसके शिखर पर चांद का प्रतीक भी लगवाया। और साथ ही जेठ के मंगलवार को बड़े मंगलवार का दर्जा दे उसे सेवा के नाम समर्पित कर दिया गया।

    हनुमान जी जैसा सेवक और भक्त ब्रह्माण्ड में न पहले कभी हुआ न आगे कभी होगा। सेवा की परंपरा और संस्कृति को आगे बढ़ाते हुए नवाब वाजिद अली शाह ने जेठ के तपते माह को सौहार्द और सेवा की शीतल हवा से गुलजार कर दिया।

    उस समय का दौर वह था जब जेठ की भीषण गर्मी में प्यासे राहगीरों को शर्बत पिलाने के लिए नवाब और आम जनमानस एक साथ खड़े होते थे। बड़े मंगल को समूचे अवध क्षेत्र में व्यापक भंडारा हुआ करता था। भक्ति का यह स्वरूप इतना व्यापक था कि हनुमान जी के चरणों में सिर झुकाने वाला और भंडारे में पूड़ी बांटने वाला, दोनों ही धर्म की दीवारों से ऊंचे उठकर सिर्फ इंसानियत के धर्म को निभाते थे।Why did the Tuesday of the month of Jeth become a big Tuesday in Awadh?

    आज भी जब लखनऊ के चप्पे-चप्पे पर भंडारों की खुशबू तैरती है, तो नवाबों के दौर की वह विरासत सांस लेती नजर आती है। लेकिन वक्त की धूल ने इस परंपरा के आईने को थोड़ा धुंधला भी किया है। जहाँ पुराने दौर में भंडारा एक खामोश सेवा का रूप था, वहीं आज यह कई बार शोर-शराबे और शक्ति-प्रदर्शन का जरिया बन चुका है।

    पहले मोहल्ले भर की महिलाएं और पुरुष मिलकर पूरी-सब्जी तैयार करते थे, जिससे आपसी प्रेम और सामूहिकता की मिठास गहराती थी, पर अब कैटरिंग और मशीनी इंतजामों ने उस मानवीय स्पर्श को थोड़ा कम कर दिया है। सबसे बड़ा अंतर पर्यावरण के मोर्चे पर दिखता है। वह दौर मिट्टी के कुल्हड़ों और पत्तलों की सादगी का था, जबकि आज प्लास्टिक और कचरे के ढेर हमारी भक्ति पर सवालिया निशान खड़े करते हैं।

    फिर भी बड़ा मंगल आज भी उतना ही पवित्र है जितना अपने आदि में। आज के इस भागदौड़ भरे और बंटे हुए दौर में, यह उत्सव हमें वापस उसी मोड़ पर ले आता है जहाँ सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। यदि हम आधुनिकता के ताम-झाम के बीच पुराने दौर वाली विनम्रता, निस्वार्थ भाव और प्रकृति के प्रति सम्मान को फिर से जोड़ सकें, तो अवध का यह ‘बड़ा मंगल’ पूरी दुनिया के लिए प्रेम और सद्भाव का सबसे बड़ा संदेश पुनः बन सकता है। यह त्योहार आज भी हमें सिखाता है कि बजरंगबली की कृपा उन पर सबसे ज्यादा बरसती है, जो भूखे का पेट भरने और प्यासे को पानी पिलाने में अपनी आस्था खोजते हैं।

    #foryouシ #highlight #follower #humanity #बड़ामंगल #BadaMangal #अवध #हनुमानजी #सौहार्द
    Shagun

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