हाई कोर्ट ने BBAU में अनैतिक भर्तियों के खिलाफ कुलपति के साथ अन्य को जारी किया सम्मन

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सांसद अंजुबाला और सांसद सावित्री बाई फुले ने कहा ये सत्य की जीत है


आरक्षण से सम्बन्धी मामले में तीन अन्य को भी मिली नोटिस, अगली सुनवाई 11 जनवरी को


लखनऊ 14 दिसम्बर। हाई कोर्ट ने BBAU में हुयी अनैतिक भर्तियों के खिलाफ कुलपति के साथ अन्य लोगों को सम्मन जारी किया है बताया जाता है कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विवि, लखनऊ में भ्रष्टाचार और धांधली का दौर चरम पर है। विवि एक बहुत ही बड़ा भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है। इससे पहले विवि के एक प्रोफेसर को CBI ने भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया था। क्योकि वह रुपये लेकर नौकरियों में नियुक्तियां कर रहे थे।

इसी मीटिंग में सांसद अंजू बाला और सांसद सावित्री बाई फुले ने अनिमितताओं का किया था बहिष्कार

मिली जानकारी के अनुसार विवि में बड़ी मात्रा में असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्तियां के लिए आवेदन मांगे गए थे। जिसमें सांसद सावित्री बाई फुले जी ने विवि प्रशासन के द्वारा भर्तियों में रोस्टर को नियमानुसार लागू न करने के कारण हाई कोर्ट लखनऊ बेंच और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, नई दिल्ली के माध्यम से आपत्ति जाहिर की थी।

लेकिन विवि प्रशासन ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना को दरकिनार करते हुए विगत दिनों बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (BOM) की बैठक जो नई दिल्ली में आयोजित की गई थी। उक्त बैठक बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की सदस्य सांसद अंजुबाला जी ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए नियुक्तियों के लिफाफे न खोलने का पूरा जोर डाला था। जिसके लिए वो सभी सदस्यों से काफी तीखी बहस भी की थी।

बताया जाता है कि माननीय सांसद अंजुबाला जी ने बैठक पर आरोप लगाया था कि उनकी बातों को नियम के विरुद्ध अनसुना किया गया, इस वजह से उन्होंने बैठक का वहिष्कार भी कर दिया था। सांसद अंजुबाला जी ने भी आरोप लगाया था कि विवि प्रशासन माननीय हाई कोर्ट के दिशानिर्देशों की अवहेलना कर नियम विरुद्ध नियुक्तियों के लिफाफे खोले गए।
जिसके लिए माननीय सांसद जी ने इस नियमितता के खिलाफ दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस भी की थी।

विवि प्रशासन की इस अनियमिता के खिलाफ आवाज उठाने वाली सांसद सावित्री बाई फुले ने ही रोस्टर प्रक्रिया का पालन न करने का आरोप लगाया था। जिसमें सांसद सावित्रीबाई फुले जी ने लखनऊ में विवि प्रशासन के गलत तरीक़े से लिफाफे खोलने के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी।

दोनों सांसदों का आरोप था कि बोम की दिल्ली बैठक में दोनों की बातों और आपत्तियों को दरकिनार करते हुए उक्त पदों की नियुक्तियों के लिफाफे खोले गए थे और उनके साथ बैठक में कई सदस्यों ने अभद्रता भी की थी।

कोर्ट ने आदेश दिया था कि नियुक्तियों के लिफाफे जब तक नही खोलने दिया जाए तब तक सभी लोगों की आपत्तियों को दूर न किया जाए। लेकिन विवि प्रशासन ने हाई कोर्ट के आदेश अवहेलना करते हुए लिफाफे खोलने की वजह से मामला कोर्ट में लंबित था।

मंगलवार दिनांक 12 दिसम्बर 2017 को इस मामले पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायाधीश जी ने विवि प्रशासन के द्वारा की गई अनैतिक तरीके से भर्तियों पर विवि प्रशासन को कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने पर फटकार लगाई और विवि के कुलपति, रजिस्ट्रार व MHRD के प्रतिनिधि को हाई कोर्ट में उपस्थित होने का सम्मन जारी कर दिया है।

हाई कोर्ट के इस निर्णय पर जब सांसद अंजुबाला जी ने प्रतिक्रिया पर कहा है कि ये सत्य की जीत है और जिसके लिए उन्होंने अकेले अपनी आवाज बुलंद की है। विवि की इस अनैतिक भर्तियों के खिलाफ आरोप दाखिल करने वाली सांसद सावित्री बाई फुले जी का कहना है कि अभी लड़ाई खत्म नही हुई है। वो विवि को बर्बाद करने वाले भ्रष्टचारियों का पर्दाफाश करके ही मानेगी। उन्होंने कहा है कि हम दोनों सांसद विवि में हो रही धांधली को उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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