निकाय चुनाव: सब प्रत्याशी तो खास हैं!

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1982

“निकाय चुनाव: मतदाता”

मेरे कस्बे में भी चुनाव है।
सब प्रत्याशी तो खास हैं।।
कोई चाचा, तो कोई मामा।
कोई भाई तो कोई सखा।।
सभी बेहतर हैं सभी जानदार हैं।
किसे चुनूँ आज ये सवाल है?
मतदाता तो वाकई में परेशान है।
हाँ! ये स्थानीय निकाय चुनाव हैं।।
खुलकर किसी के साथ हो,
तो औरों से विरोध है।
शांति से किसी के साथ तो,
वो सबके लिये आम है।।
कल के जैसा मतभेद हो तो ठीक है।
पर अब तो वैमनस्यता की चहूँओर आग है।।
मतदाता तो वाकई में परेशान है।
हाँ! ये स्थानीय निकाय चुनाव है।।
मेरे कस्बे में भी चुनाव है।
सब प्रत्याशी तो खास हैं।।
                       राहुल कुमार गुप्त

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