लखनऊ, 29 जुलाई 2025: भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक एआई-समर्थित समाजशास्त्रीय अध्ययन उपकरण को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से पेटेंट (संख्या: 454873-001) प्राप्त हुआ है। यह उपकरण सामाजिक शोध में तकनीक के उपयोग में क्रांतिकारी कदम है।
लखनऊ के बीबीएयू और शकुंतला विश्वविद्यालय तथा कानपुर के सीएसजेएम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं डॉ. नीरज कुमार, डॉ. शंकर कुमार लाल, डॉ. देवेश कटियार और डॉ. रत्नार्तुः मिश्रा की टीम ने इसे पूर्णतः स्वदेशी रूप से विकसित किया है।
यह उपकरण सामाजिक डेटा को तीव्र, सटीक और वैज्ञानिक तरीके से एकत्रित व विश्लेषित करता है, जिससे शोधकर्ता समाज की मानसिकता और जरूरतों को बेहतर समझ सकेंगे। नीति निर्माण, सरकारी योजनाओं के आकलन और ग्रामीण-शहरी आवश्यकताओं के अध्ययन में यह उपकरण अहम भूमिका निभाएगा।
बता दें कि पेटेंट इसकी अनूठी डिज़ाइन और संरचना के लिए दिया गया है, जो इसे व्यावसायिक दुरुपयोग से सुरक्षित रखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपकरण शोध, शिक्षा और एनजीओ के फील्ड वर्क को और प्रभावी बनाएगा।यह उपलब्धि भारत की नवाचार क्षमता को वैश्विक मंच पर स्थापित करती है, जो तकनीक और समाजशास्त्र के संगम से शोध पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त करेगी।







