बस,नलों में पानी नहीं है,बाकी सब जगह हैं
बरसात में पानी खूब आ रहा है। बीसलपुर में भी पानी आ रहा है। सड़कों पर भी खूब पानी बह रहा है। घरों म़े पानी है, दुकानों में पानी है। पर, अपने अजमेर की बदकिस्मती है कि बस नलों में पानी नहीं आ रहा है। कभी बिजली की ट्रिपिंग,कभी पाइप लाइन में गड़बड़ी और मेंटिनेंस। सालों से लोग परेशानी भुगत रहे हैं। पहले तो 24 घंटे में जल वितरण का सपना दिखाया गया। फिर 48 घंटे में पानी वितरण का दावा किया गया। लेकिन कुछ किस्मत वाले इलाके ही ऐसे हैं,जहां 48 घंटे में पानी आता होगा। वरना, तो पूरे शहर में तीन दिन के अंतराल में भी नियमित पानी मिल जाए, तो मौहल्लों में खुशियां मनाई जाती है। रोजाना अखबारों में जलसंकट की खबरें तपती रहती है। बीसलपुर में दो साल का पानी आ गया है, लेकिन घरों तक पहुंचने के इंतजाम ही नहीं हैं।
अब जब पानी आने का दिन ही तय नहीं है, तो फिर समय कैसे तय किया जा सकता है? इसलिए कभी सुबह,कभी दोपहर, तो कभी शाम को नलों से मेहरबानी टपकती है। अब इस दौरान अगर कोई नौकरी पर हो या दुकान पर हो,तो जलदाय विभाग का क्या दोष? पानी चाहिए तो इंतजार कीजिए। सालों से समस्या है,पर समाधान नहीं है। सरकार किसी की रही हो,मुसीबत लोगों ने ही भुगती है। नेता आश्वासन का पानी पिलाते हैं और लोग भरोसे से प्यास बुझा लेते हैं। भाषणों और बैठकों में वो भी चिंता जताते हैं। समाधान का भरोसा देते हैं। कोशिश करते हैं। लेकिन पता नहीं फच्चर कहां फंस जाता हैं। कागजों में कई योजनाएं चल रही है। अरबों रूपए मंजूर हो चुके हैं। बीसलपुर से समानांतर पाइप लाइन कब डलेगी,पता नहीं।
बारह सौ करोड़ से स्मार्ट सिटी बन चुका है अजमेर। लेकिन विकास कम,इससे शहर का विनाश ज्यादा हुआ है। जब आधारभूत विकास की प्रारंभिक जरूरतें पानी,बिजली,सड़क,नाले-नालियां और चिकित्सा जैसी व्यवस्थाएं ही पर्याप्त और संतोषजनक ना हो,तो काहे का स्मार्ट सिटी। – ओम माथुर







